कोई शौहर अपनी बीवी से पागलपन की हद तक प्यार कैसे कर सकता है?
 एक बूढ़ी खातून का इंटरव्यू

जिन्होंने अपने शौहर के साथ पचास साल का अर्सा पुरसुकून तरीके से हंसी खुशी गुजारा
🍀 खातून से पूछा गया कि इस पचास साला पुरसुकून जिंदगी का राज़ क्या है? 
क्या वो खाना बनाने में बहुत माहिर थीं?
या फिर उनकी खूबसूरती इसका सबब है? 
या ढेर सारे सारे बच्चों का होना इसकी वजह है या फिर कोई और बात है? 
🍀 बूढ़ी खातून ने जवाब दिया : पुरसुकून शादीशुदा जिंदगी का दारोमदार अल्लाह की तौफीक के बाद औरत के हाथ में है, औरत चाहे तो अपने घर को जन्नत बना सकती है और वो चाहे तो इसके बरअक्स यानी जहन्नुम भी बना सकती है. 
इस सिलसिले में माल का नाम मत लीजिए,
बहुत सारी मालदार औरतें जिनकी जिंदगी अजीरन बनी हुई है, शौहर उनसे भागा भागा रहता है 
खुशहाल शादीशुदा जिंदगी का सबब औलाद भी नहीं है, बहुत सारी औरतें हैं जिनके दसियों बच्चे हैं फिर भी वो शौहर की मोहब्बत से महरूम हैं बल्कि तलाक तक की नौबत आ जाती है 
बहुत सारी ख्वातीन खाना पकाने में माहिर होती हैं, दिन दिन भर खाना बनाती रहती हैं लेकिन फिर भी उन्हें शौहर की बदसलूकी की शिकायत रहती है 
🍀 इंटरव्यू लेने वाली खातून सहाफी को बहुत हैरत हुई, उसने पूछा :
फिर आखिर इस खुशहाल जिंदगी का राज़ क्या है ? 
🍀बूढ़ी खातून ने जवाब दिया : जब मेरा शौहर इंतहाई गुस्से में होता है तो मैं खामोशी का सहारा ले लेती हूं लेकिन इस खामोशी में भी एहतराम शामिल होता है, मैं अफसोस के साथ सर झुका लेती हूं. 
ऐसे मौके पर बाज़ ख्वातीन खामोश तो हो जाती हैं लेकिन इसमें तमस्सुर का उनसुर शामिल होता है इससे बचना चाहिए, समझदार आदमी इसे फौरन भांप लेता है 
🍀 नामा निगार खातून ने पूछा : ऐसे मौके पर आप कमरे से निकल क्यों नहीं जातीं? 
🍀 बूढ़ी खातून ने जवाब दिया : नहीं, ऐसा करने से शौहर को ये लगेगा कि आप उससे भाग रही हैं उसे सुनना भी नहीं चाहती हैं.
ऐसे मौके पर खामोश रहना चाहिए और जब तक वो पुरसुकून ना हो जाए उसकी किसी बात की मुखालफत नहीं करनी चाहिए. 
🍀 जब शौहर किसी हद तक पुरसुकून हो जाता है तो मैं कहती हूं :
पूरी हो गई आपकी बात ?
फिर मैं कमरे से चली जाती हूं
क्योंकि शौहर बोल बोल कर थक चुका होता है और चीखने चिल्लाने के बाद अब उसे थोड़े आराम की जरूरत होती है. 
मैं कमरे से निकल जाती हूं और अपने मामूल के कामों में मसरूफ हो जाती हूं. 
🍀 खातून सहाफी ने पूछा : इसके बाद आप क्या करती हैं? क्या आप बोल चाल बंद करने का उसलूब अपनाती हैं? एक आध हफ्ता बात चीत नहीं करती हैं? 
🍀 बूढ़ी खातून ने जवाब दिया : नहीं ! 
इस बुरी आदत से हमेशा बचना चाहिए,
ये दोधारी हथियार है,
जब आप एक हफ्ते तक शौहर से बात चीत नहीं करेंगी ऐसे वक्त में जब कि उसे आपके साथ मुसालहत की जरूरत है तो वो इस कैफियत का आदी हो जाएगा और फिर ये चीज बढ़ते बढ़ते खतरनाक किस्म की नफरत की शक्ल अख्तियार कर लेगी. 
🍀 सहाफी ने पूछा : फिर आप क्या करती हैं? 
🍀 बूढ़ी खातून बोलीं :
मैं दो तीन घंटे बाद शौहर के पास एक गिलास जूस या एक कप कॉफी लेकर जाती हूं और मोहब्बत भरे अंदाज में कहती हूं: पी लीजिए. 
हकीकत में शौहर को इसी की जरूरत होती है. 
फिर मैं उससे नॉर्मल अंदाज में बात करने लगती हूं.
वो पूछता है क्या मैं उससे नाराज हूं? 
मैं कहती हूं : नहीं. 
इसके बाद वो अपनी सख्त कलामी पर माज़रत जाहिर करता है और खूबसूरत किस्म की बातें करने लगता है. 
इंटरव्यू लेने वाली खातून ने पूछा : और आप उसकी ये बातें मान लेती हैं? 
🍀 बूढ़ी खातून बोलीं : बिल्कुल, मैं कोई अनाड़ी थोड़ी हूं, मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा होता है. 
क्या आप चाहती हैं कि मेरा शौहर जब गुस्से में हो तो मैं उसकी हर बात का यकीन कर लूं और जब वो पुरसुकून हो तो तो उसकी कोई बात ना मानूं? 
खातून सहाफी ने पूछा : और आपकी इज्जत नफ्स
🍀 बूढ़ी खातून बोलीं :
पहली बात तो ये कि मेरी इज्जत नफ्स उसी वक्त है 
जब मेरा शौहर मुझसे राजी हो 
 और हमारी शादीशुदा जिंदगी पुरसुकून हो 
दूसरी बात ये कि शौहर बीवी के दरमियान इज्जत नफ्स नाम की कोई चीज नहीं होती 
जब मर्द व औरत एक दूसरे के लिबास हैं तो फिर कैसी इज्जत नफ्स ??