(18)लेख
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(बकलम महमूदुलबारी)
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मजबूर नहीं, मजबूत बनो;
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अलहमदुलिल्लाह रब्बिल आलमीन, जिसने हमें जिंदगी दी, मुश्किलों में सब्र की ताकत दी, और हर तंगी में आसानी का वादा किया। दुरूद ओ सलाम हो हमारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ पर, जो हमें हौसला, इस्तिक़ामत और अल्लाह पर भरोसे का दरस दे कर इस दुनिया में मशअल-ए-राह बने।
इंसानी जिंदगी में मुश्किलें, परेशानियां, इम्तिहान और नाकामी के लम्हात आना फितरी बात है। हर इंसान को किसी न किसी मरहले पर एहसास होता है कि वह कमजोर है, उसकी ताकत खत्म हो रही है, हालात उस पर हावी हैं और उसका दिल मायूसी से भर गया है। नाकामी; दुख; तन्हाई; और उलझन का सामना करता है; कई बार दिल कमजोर हो जाता है; उम्मीद खत्म होने लगती है; और इंसान खुद को मजबूर; बेबस और बे सहारा महसूस करने लगता है; लेकिन दीन इस्लाम हमें यही नहीं सिखाता कि हम हालात के सामने हार जाएं, बल्कि हमें यह नसीहत देता है कि हम मायूसी को छोड़ें, खुद को मजबूत बनाएं,
इस्लाम हमें कमजोरी से नहीं बल्कि ताकत से रोशनास कराता है, मायूसी से नहीं बल्कि उम्मीद से जुड़ने का दरस देता है।
अल्लाह रब्बुल इज्जत कुरान में इरशाद फरमाता है:
> "وَلَا تَهِنُوا وَلَا تَحْزَنُوا وَأَنتُمُ الْأَعْلَوْنَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ"
(आल इमरान: 139)
यानी, ऐ मोमिनो! कमजोर न बनो, गमगीन न हो, तुम ग़ालिब रहोगे अगर तुम मोमिन हो। क्या यह पैगाम नहीं कि हमारा ईमान हमें ताकत देता है? कमजोरी का खात्मा और मजबूती का आगाज ईमान से होता है!
इसी तरह अल्लाह फरमाते हैं:
> "إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا، إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا"
(अल-शरह: 5-6)
यह दो बार दोहरा कर अल्लाह ने हमारे दिल में उम्मीद बिठाई है कि हर सख्ती के साथ आसानी है, हर अंधेरी रात के बाद सुबह है।
रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:
> "المؤمن القوي خير وأحب إلى الله من المؤمن الضعيف وفي كل خير احرص على ما ينفعك واستعن بالله ولا تعجز"
(सही मुस्लिम)
यानी, ताकतवर मोमिन कमजोर मोमिन से बेहतर और अल्लाह को ज्यादा पसंद है, और हर हालत में खैर है। जो फायदा दे उसकी तलाश करो, अल्लाह से मदद लो और बेबस न बनो!
यही है असल सबक—दुआ, सब्र और कोशिश के जरिए अपनी ताकत को बढ़ाना, मुश्किलों से न घबराना, और हर दिन को अल्लाह की रज़ा के साथ गुजारना।
जब परेशानी छा जाए, तो दिल को मजबूत बनाने के लिए अल्लाह की पनाह का सहारा लें:
حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ – “हमारे लिए अल्लाह ही काफी है और वह बेहतरीन मददगार है।”
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ الصَّابِرِينَ – “ऐ अल्लाह! मुझे सब्र करने वालों में शामिल फरमा।”
اللَّهُمَّ لاَ سَهْلَ إِلاَّ مَا جَعَلْتَهُ سَهْلاً – “ऐ अल्लाह! कोई चीज आसान नहीं मगर जो आप आसान बनाएं।”
رَبِّ أَعِنِّي عَلَى ذِكْرِكَ وَشُكْرِكَ وَحُسْنِ عِبَادَتِكَ – “ऐ परवरदिगार! मुझे याद, शुक्र और इबादत में मदद दे।”
यह दुआएं दिल की बेचैनी को सुकून में, खौफ को यकीन में, और मायूसी को उम्मीद में बदल देती हैं।
अमीरुल मोमिनीन सैय्यदना हज़रत अली रज़ी अल्लाह अन्हु फरमाते हैं:
"لا تجعل الهم يأخذك، فإن الهم يميت القلب"
यानी गम को अपने दिल पर हावी न करो, यह दिल को मारता है।
शेख अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं:
"اعلم أن قوتك في صبرك وعزمك"
यानी अपनी ताकत को सब्र और अज़्म में तलाश करो।
विंस्टन चर्चिल का कौल भी दिल को जगाता है:
"Success is not final, failure is not fatal: it is the courage to continue that counts."
कामयाबी आखिरी मंजिल नहीं और नाकामी तबाह कुन नहीं, असल बात हिम्मत को कायम रखना है।
डेल कार्नेगी फरमाते हैं:
"Do not be afraid of difficulties, for they are the stepping stones to success."
मुश्किलें कामयाबी की सीढ़ियां हैं, इनसे खौफ न खाओ!
1. नमाज़ को मामूल बनाएं – रोजाना पांच वक्त की नमाज़ आपके दिल को सुकून देगी और हौसले को बढ़ाएगी।
2. दुआ को रोजमर्रा का हिस्सा बनाएं – सुबह, शाम और परेशानी के वक्त अल्लाह से मदद मांगें।
3. छोटे अह्दाफ मुकर्रर करें – दिन को एक मकसद दें और इसे पूरा करने की कोशिश करें।
4. सकारात्मक बातचीत अपनाएं – खुद को यह कहें: “मैं अल्लाह का बंदा हूं, वह मेरे साथ है, मैं कामयाब होऊंगा!”
5. तनकीद से बचें – नाकामी के बाद खुद को कोसने की बजाए सीखने के मौके को कुबूल करें।
6. सेहत का ख्याल रखें – नींद, गिजा और वर्जिश को अपनी मजबूती का हिस्सा बनाएं।
7. सोहबत का इंतखाब करें – नेक, बाहौसला, दीन दार लोगों के साथ वक्त गुजारें।
8. दूसरों की मदद करें – खिदमत इंसान को मजबूत बनाती है, दिल को सुकून और रूह को राहत देती है।
9. तजरबात को सबक बनाएं – हर मुश्किल में नया दरस तलाश करें।
✅ जब आप खुद को कमजोर महसूस करें तो फौरन दुआ करें और इस आयत को दोहराते रहें:
"فَإِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا"
, जब कोई आपकी कामयाबी को नजरअंदाज करे तो याद रखें कि अल्लाह हर हालत में आपका मददगार है।
, जब नाकामी हो तो खुद से यह कहें: “यह इम्तिहान मुझे मजबूत बना रहा है, मुझे हिम्मत नहीं हारनी!”
. हर दिन एक नई उम्मीद का मौका है, इसे जाया न करें।
. जिंदगी का मकसद परेशानियों से भागना, नहीं बल्कि उनका सामना करना है। अगर हम अपने आप को कमजोर, मजबूर और बेबस समझेंगे तो मुश्किलें हमें नीचे गिरा देंगी, लेकिन अगर हम खुद को मजबूत, बाहौसला और अल्लाह पर भरोसा करने वाला समझेंगे तो मुश्किलें हमें नई बुलंदियों तक ले जाएंगी।
याद रखें:
. ताकत जिस्मानी नहीं, इरादे की होती है
. मुश्किलों का सामना इंसान को निखारता है
अल्लाह की मदद हमेशा उनके साथ है जो हिम्मत नहीं हारते
✔ हम परेशानियों का सामना करेंगे, उनसे भागेंगे नहीं
✔ हम अपनी दुआओं को अपनी ताकत बनाएंगे
✔ हम सब्र और अमल से अपने मकसद को हासिल करेंगे
✔ हम मायूसी को अपनी जिंदगी में जगह नहीं देंगे
✔ हम अल्लाह पर भरोसा रखते हुए हर मुश्किल को उबूर करेंगे
✔ हम खुद को मजबूत बनाएंगे ताकि दूसरों की भी मदद कर सकें
मजबूरी एक हाल है, मजबूती एक इंतखाब। मुश्किलें आती रहेंगी लेकिन जो अपने ईमान, सब्र, दुआ और अमल से खुद को मजबूत बनाता है वह जिंदगी की आज़माइशों को उबूर कर के कामयाबी हासिल करता है।
लिहाजा, अपने दिल से यह बात निकाल दें कि "मैं मजबूर हूं", और उसकी जगह यह पैगाम बिठाएं कि "मैं मजबूत बनूंगा, अल्लाह मेरी मदद करेगा, और मैं हर मुश्किल को उबूर कर सकता हूं"।
ऐ अल्लाह! हमें वह हौसला दे जिससे हम मायूसी में न गिरें, वह सब्र दे जिससे हम मुश्किलों का सामना कर सकें, वह अज़्म दे जिससे हम अपनी मंजिल तक पहुंचें, और वह नूर दे जिससे हमारे दिल रोशन हों। हमें अपने वादे की याद दिला और हर इम्तिहान में अपनी मदद से नवाज..
आमीन या रब्बुल आलमीन।
mahmoodulbari342@gmail.com