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लेखक : हज़रत मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद शफ़ी उस्मानी रहमतुल्लाह अलैह 


✍🏻टिप्पणीकार: गुल रज़ा राही अररियावी 


आक़ा-ए-नामदार की सीरत हर दौर में पूरी आलम-ए-इंसानियत के लिए ज़रीया-ए-हिदायत व नजात है, उनकी ज़िंदगी अवाम व ख़्वास के लिए मशअल-ए-राह है जिसकी रौशनी में इंसान कामयाब ज़िंदगी गुज़ार सकता है, ज़िंदगी का कोई शोबा ऐसा नहीं है जिसमें आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात व रहनुमाई मौजूद न हो, वो तो रसूल-ए-हादी थे जिन्होंने इंसान को दीन-ए-फ़ितरत की दावत दी और इसकी जद्दोजहद में अपनी जान की भी परवाह न की और हर बातिल ताक़तों के सामने डट कर क़ायम रहे और तमाम नागवार ख़ातिर सुलूक को बर्दाश्त किया, अरब की जहालत का ख़ात्मा किया, लोगों के आदात-ए-रज़ीला व ख़साइसा-ए-लईना की इस्लाह की, बेशुमार गुम गश्त-ए-राह को हिदायत के रास्ते पर गामज़न फ़रमाया -

वो तमाम रसूमात जो मुआशरे के लिए सम-ए-क़ातिल थे उसको ख़त्म करके एक सालेह मुआशरा तश्कील दिया जिसमें ज़लालत व गुमराही का ज़र्रा बराबर भी शाइबह न था

तो ज़रूरत थी इस बात की कि ऐसे मुक़द्दस शख़्सियत और कामिल सिफ़ात वाले सैय्यद-उल-बशर की ज़िंदगी को क़लम बंद कर दिया जाए ताकि हर दौर में आपकी ज़िंदगी से इस्तिफ़ादा किया जाए-

 दुनिया ने देखा जब इसके जानिसारों ने क़लम को हाथ में लिया तो उनकी ज़िंदगी की हर नक़ल व हरकत ،गुफ़्तार व किरदार ،शेअर व सलीक़ा को क़लम बंद किया और न सिर्फ़ किताबों में इसको नक़्श किया बल्कि उनकी तर्ज़-ए-हयात को मुकम्मल तरीक़े पर अपनी ज़िंदगी का जुज़-ए-लायनफ़क बनाया और इसकी नश्र व अशाअत में पूरी कोशिश सिर्फ़ कर दी -

सीरत निगारी इसी कोशिश का  एक अहम हिस्सा है ताकि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़िंदगी का नक़्शा हर दौर में लोगों के सामने रहे और इसी तर्ज़ पर लोग अपनी ज़िंदगी गुज़ार सकें

इस पर लोगों ने तीन तरह की किताबें लिखीं (1) आला (2) मुतवस्सित (3) अदना 

आला किताब जो कई सौ सफ़हात और जिल्दों में मुतव्वल व मुफ़स्सल है, इसमें हर वाक़यात व हालात मुफ़स्सल तरीक़े से दलाइल व शवाहिद के साथ लिखे हैं, यह किताब उन लोगों के लिए जो इल्मी, तहक़ीक़ी ज़ेहन का हामिल हो,

मुतवस्सित किताब उन हज़रात के लिए है जो दीगर उमूर में मशाग़िल हों जिनके लिए तहक़ीक़ी किताब समझना और इसका मुताला करना दुश्वार हो तो इसके लिए मुतवस्सित किताबें हैं जिसके सामने क़दरे तफ़सील के साथ सीरत-ए-नबवी नक़्शा का आजाए और उसको अपनी ज़िंदगी में शामिल कर ले

अदना किताब जिसमें सीरत-ए-नबवी का तज़किरा इजमालन जामियत बयान किया गया हो और सीरत-ए-नबविया के तमाम मुश्तमिलात को मुख़्तसरन ज़िक्र दिया हो ताकि जो पढ़ने लिखने और इस तरह के मशाग़िल से दूर हैं और ज़्यादा पढ़े लिखे भी नहीं है तो यह लोग भी इसके मुताला से महरूम न हो जाए तो इसके लिए सीरत निगारों ने निहायत सहल तर्ज़ उसलूब आसान ज़बान में किताबें ताकि हर ख़ास व आम सीरत-ए-नबविया, उसवा-ए-हसना आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपने सामने महसूस करे -

तारीख़ में आज तक किसी शख़्स इस तरह तज़किरा नहीं किया गया (जिस तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का किया गया ) कि इससे कोई भी आम इंसान भी महरूम न रहे -

उर्दू ज़बान में सीरत की आसान किताब में जो मक़बूलियत हज़रत मौलाना मुफ़्ती शफ़ी उस्मानी साहब रह की किताब "सीरत-ए-ख़ातम-उल-अंबिया ओजज़-उस-सीर लख़ैर-उल-बशर" को है वो सब के सामने है 

सौ सफ़हात पर मुश्तमिल किताब जो कि एक नशिस्त में पढ़ी जा सकती है,

इसके बारे में खुद साहिब-ए-किताब फ़रमाते हैं यह किताब 100 दिन के अंदर ही मुल्क के बहुत से मदारिस में दाख़िल-ए-निसाब हो गई खुद हकीम-उल-उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ़ थानवी रह ने अपने मदरसे में दाख़िल-ए-निसाब किया -

 आज भी यह किताब इब्तिदाई दरजात के तलबा को पढ़ाई जाती है ताकि सीरत-ए-नबवी का कुछ हिस्सा मुख़्तसरन इसके ज़ेहन पर नक़्श हो जाए और आइंदा किताब पढ़ने समझने में आसानी पैदा हो -

इस किताब की खुसूसियत यह है कि इसमें अग़्यार व मुस्तशरिकीन का आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर तअद्दुद-ए-अज़वाज और जिहाद को लेकर एतराज़ात का मुख़्तसर तशफ्फी बख़्श जवाब भी दिया गया है, वाक़यात-ए-मुतफ़र्रिका उनवान से मख़सूस बातें भी ज़िक्र की गई हैं 

और मुहश्शी ने तहक़ीक़ी हाशिये लगा कर कुछ मशहूर बातें जिसकी कोई हक़ीक़त नहीं इसका रद्द किया है और सही बात को ज़िक्र किया है-

राक़िम-ए-आसी ने यह किताब शुरू में नहीं पढ़ी थी बल्कि दूसरी किताब पढ़ी थी-

साल-ए-अव्वल में यह किताब मंगवाया था पर कुछ सफ़हात के बाद वो मुताला न हो सका वो कहाँ चली गई पता नहीं 

फिर इमसाल ख़ुदा के फ़ज़्ल व करम से यह सआदत मिली कि इस किताब को ख़रीदा दीगर मशाग़िल तर्क करके चंद घंटों में मुताला मुकम्मल किया -

 मर्द, ख़वातीन बच्चे जो उर्दू पढ़ते हैं उनको यह किताब ज़रूर मुताला करना चाहिए इंशाअल्लाह सीरत-ए-नबवी का ख़ाका ज़रूर ज़ेहन में मुर्तसिम हो जाएगा जिसकी रौशनी में ज़िंदगी गुज़ारने और उसको पाकीज़ा बनाने में मुआविन बनेगा-


अल्लाह तआला साहिब-ए-किताब को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए,

इसको जदीद तर्ज़ में ढालने अल्फ़ाज़ की तशरीह तौज़ीह करने वाले हज़रात को जज़ा-ए-ख़ैर अता फ़रमाए आमीन