फ़ातिमा बहुत ही नेक और बा अमल खातून है। वह हर वक़्त रब तबारक व ताला के अहकाम और हुज़ूर ताजदार ख़त्म नुबूवत ﷺ के फ़रामीन मुबारकह को सीखने, समझने और उन पर अमल पैरा होने की कोशिश करती रहती है। वह जो भी सीखती है, पहले खुद अमल करती है और अपने बच्चों को भी दीन की बातें बताती है और उनको अमल की तरग़ीब भी दिलाती है। बच्चों के नेक काम करने पर, तोहफ़े दे कर उनकी हौसला अफ़ज़ाई भी करती रहती है।
आज के दरस क़ुरआन में उसने बातिनी बीमारियों के बारे में जाना। उस्तानी साहिबा ने बातिनी बीमारियों की मज़ीद मालूमात हासिल करने के लिए इहया उल उलूम किताब की तीसरी जिल्द का मुताला करने की तरग़ीब दिलाई। तो उसने मुताला शुरू किया। जैसे जैसे वह इन बीमारियों के बारे में पढ़ती जाती, खुद को और अपने बच्चों को उन से बचाने की नियतें करती। जब उसका मुताला मुकम्मल हुआ, तो उसने अपने बच्चों को इन बीमारियों की जानकारी देनी शुरू की।
उसने अपने सारे बच्चों को अपने पास बुलाया, उनको प्यार किया और मुहब्बत भरे अंदाज़ में कहा: मेरे प्यारे बच्चों! आज मैं तुम सब को ऐसी बीमारियों के बारे में बताने वाली हूँ, जो बज़ाहिर नज़र तो नहीं आतीं; लेकिन यह जिस्मानी अमराज़ से बहुत ज़्यादा ख़तरनाक होती हैं। बच्चों ने बहुत ही हैरत से सवाल किया: अम्मी! ऐसी कौन सी बीमारियाँ हैं जो नज़र नहीं हैं?
फ़ातिमा ने कहा: खूब ग़ौर से सुनो! और इन बीमारियों से बचने की नीयत भी कर लो, ताकि बरकतें हासिल हों। जिस तरह जिस्मानी बीमारियाँ हमारे जिस्म को कमज़ोर कर देती हैं, इसी तरह दिल की भी बीमारियाँ होती हैं और वह हमारे दिल को मैला कर देती हैं। मेरे प्यारे बच्चों! हमेशा इन बीमारियों से बचते रहना।
सबसे पहले मैं तुम्हें हसद के बारे में बताती हूँ। हसद को आसान ज़बान में कहूँ तो किसी की नेमत, दौलत, हुस्न या इल्म को देख कर उसके छिन जाने की चाहत करना। जैसे कि तुम सब में उज़मा बहुत खूबसूरत है, तो उसकी खूबसूरती को देख कर तुम सब दिल ही दिल में उसकी खूबसूरती छिन जाने की तमन्ना करो।
अब इस से बचें कैसे? तो सबसे पहले तुम सब को यह ग़ौर करना है कि अगर उज़मा खूबसूरत है, तो उसको खूबसूरती किस ने अता की? बताओ सभी? सभी बच्चों ने कहा: अल्लाह ताला ने। फ़ातिमा बोली: जब अता करने वाला अल्लाह है, तो उसकी रज़ा में राज़ी रहो और अल्लाह ताला का हर हाल में शुक्र अदा करो। और अगर कभी हसद पैदा होने लगे तो अल्लाह ताला से इस बीमारी से बचने की दुआ करो।
दूसरी बीमारी है रियाकारी यानी कि दिखावा। अच्छा बताओ! हम सभी किस की इबादत करते हैं? सारे बच्चों ने एक साथ कहा: अल्लाह ताला की। फ़ातिमा ने कहा: किसी भी नेक काम को अल्लाह ताला की रज़ा के अलावा लोगों को दिखाने के लिए करना, रियाकारी कहलाता है। मिसाल के तौर पर अली बहुत अच्छी नात पाक पढ़ लेता है। अगर वह अपने दोस्तों के सामने इस नीयत से नात पाक पढ़े कि उसकी तारीफ़ हो और लोग उसकी वाह वाही करें, तो उसने रियाकारी की।
रियाकारी से बचने के लिए हमेशा यह बात याद रखो कि हम जो भी नेक काम करें; सिर्फ और सिर्फ अल्लाह ताला की रज़ा के लिए करें। क्यों के हमारे हर नेक अमल का सवाब अल्लाह ताला ही अता फ़रमाने वाला है, न के लोग। अगर लोगों को दिखाने की नीयत से किसी भी नेक काम को किया, तो इस का कोई भी सवाब नहीं मिलेगा।
तीसरी बीमारी का नाम है बदगुमानी यानी के बे ग़ैर किसी सबूत के, किसी के बारे में बुरे होने का यक़ीन करना। जैसे के अगर मैं उज़मा को एक हज़ार रुपये दूँ और वह तुम सब से यह बात न बताए के अम्मी ने मुछे रुपये दिए हैं। और जब तुम सब उसके पास रुपये देखो, तो यह यक़ीन कर लो के उज़मा ने पैसे चुराए हैं।
इस बीमारी का इलाज यह के तुम लोगों की अच्छाईयों पर नज़र रखो। अगर कभी बुरा ख़याल आने भी लगे तो फ़ौरन रब तबारक व ताला की बारगाह में दुआ करो के या अल्लाह! मुझे अच्छा गुमान रखने वाला बना और बुरे गुमान से मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा। इंशाअल्लाह ताला! अल्लाह ताला करम फ़रमाएगा।
अच्छा बच्चों! अब बताओ के क्या इन बीमारियों के बारे में कुछ समझ आया? सारे बच्चों ने कहा: अलहमदुलिल्लाह! जी अम्मी! हमें बहुत अच्छे से समझ आ गया है और इंशाअल्लाह ताला! हम इन बुरी बीमारियों से बचने की पूरी कोशिश करेंगे।
फ़ातिमा ने भी अल्लाह का शुक्र अदा किया और दुआ की के या अल्लाह! अपने फ़ज़ल व करम से हम सभी को रूहानी, जिस्मानी, ज़ेहनी और क़ल्बी बीमारियों से महफ़ूज़ फ़रमा और हर हाल में अपना शुक्र अदा करने वाला बना। आमीन या रब्बुल आलमीन!