मुंबई में समुद्र भी इश्क के किस्सों का अमीन है, सड़कें रास्ते कम और मोहब्बत के बाज़ार ज़्यादा दिखाई देती हैं, हर मोड़ पर कोई न कोई दिल अपनी दुकान सजाए बैठा है, हर निगाह एक सिक्के की तरह चल रही है, हर मुस्कुराहट एक दाम बन चुकी है और हर कुर्बत मोहब्बत के नाम पर कोई नया सौदा तय कर रही है।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
मुंबई को मैं छोटा अमेरिका कहता हूँ सो यहाँ आज़ादी भी शायद अपने पूरे लिबास में घूमती है जिस तरह समुद्र की लहरें साहिल से लिपटने में कोई झिझक नहीं करतीं उसी तरह कुछ मोहब्बत के मुसाफिर भी शहर की खुली राहों को अपने जज़्बात का आँगन समझ बैठते हैं, फुटपाथ उनके लिए कालीन हैं, पार्क की बेंचें तख्त हैं, साहिल की दीवारें पर्दे हैं, शहर की भीड़ उनके लिए ऐसा पर्दा-ए-ग़फ़लत है जिसके पीछे दुनिया मौजूद होते हुए भी मौजूद नहीं है।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
यहाँ इश्क की कश्तियाँ अजीब समुद्र में तैरती हैं। कोई निगाहों की पतवार से चला रहा है, कोई मुस्कुराहट का बादबान तान रहा है, कोई वादों की हवा के सहारे बह रहा है, कभी दो दिल ऐसे करीब आ बैठते हैं जैसे दो मुसाफिर तूफान में एक ही चट्टान का सहारा ले रहे हों, कभी मोहब्बत का जोश ऐसा उमड़ता है जैसे मानसून का बादल अचानक बरस पड़ा हो और कभी शहर की रोशन सड़कों के बीच मोहब्बत के ये चिराग यूँ जलते हैं जैसे बाकी सारी दुनिया अंधेरे में छोड़ दी गई हो।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
किसी पार्क की बेंच को देखिए तो वह बेंच कम और इश्क का तख्त ज़्यादा मालूम होती है, दो मुसाफिर उस पर ऐसे विराजमान जैसे पूरी सल्तनत-ए-इश्क उन्हें अता कर दी गई हो। आस-पास लोग आते-जाते रहते हैं, बच्चे खेलते हैं, परिंदे उड़ते हैं, गाड़ियाँ शोर करती हैं मगर उनके लिए वक्त की घड़ी जैसे रुक गई हो, निगाहें निगाहों से यूँ बँधी हैं जैसे पतंग की डोर आसमान से, हाथ हाथ से यूँ जुड़े हैं जैसे बेल दरख्त से और कभी मोहब्बत की नुमाइश इस हद तक बढ़ जाती है कि गुज़रने वाला अपनी नज़रें यूँ मोड़ लेता है जैसे किसी अजनबी घर का पर्दा अचानक उठ गया हो।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
साहिल-ए-मुंबई तो गोया इश्क की खुली किताब है। समुद्र हर शाम अपना नीला वरक खोलता है और उस पर न जाने कितने नए अफ़साने लिखे जाते हैं। कोई चट्टान पर बैठा है, कोई दीवार से टेक लगाए हुए, कोई लहरों को देखते-देखते अपने ही ख्याल की लहरों में डूब गया है, बोसा यहाँ कुछ लोगों के लिए जैसे मोहब्बत की मुहर बन गया है गोया दो लफ़्ज़ों के मुआहदे पर मुहर सब्त हो गई हो और फिर वही समुद्र इन लम्हों को अपनी लहरों में ले जाकर न जाने कितनी कहानियों का हिस्सा बना देता है।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
लोकल ट्रेनें इस शहर की रगों में खून की तरह दौड़ती हैं, लाखों लोग एक मंज़िल से दूसरी मंज़िल की तरफ बहते हैं मगर इसी हुजूम में कुछ दिल ऐसे हैं जिन्हें मंज़िल से ज़्यादा एक-दूसरे की रफाकत अज़ीज़ है। स्टेशन आते हैं, ट्रेनें जाती हैं, सीटें बदलती हैं, चेहरे बदलते हैं मगर इश्क के मुसाफिर अपनी छोटी सी दुनिया में यूँ मुकैय्यद रहते हैं जैसे परिंदा खुले आसमान में भी अपने बनाए हुए पिंजरे को घर समझ ले।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
मॉल की रोशनियाँ हों या साहिल की हवा, पार्क की खामोशी हो या सड़क का शोर मुंबई का कोई न कोई गोशा मोहब्बत के किसी न किसी मंज़र का आईना बन जाता है। शहर की इमारतें जैसे आसमान से बातें करती हैं वैसे ही यहाँ के कुछ आशिक अपने ख्वाबों से बातें करते हैं फर्क सिर्फ यह है कि इमारतें ईंट और सीमेंट से बनती हैं और ख्वाब अक्सर चंद तस्वीरों और चंद वादों से।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
यह इश्क भी अजीब बाज़ार है यहाँ कोई दिल का फूल लेकर आता है और कभी खुशबू के बदले काँटा ले जाता है। कोई वादों के मोती खरीदता है और वक्त की लहरें उन्हें रेत बना देती हैं। कोई समझता है कि उसे ज़िंदगी का साहिल मिल गया मगर चंद कदम बाद मालूम होता है कि वह तो सराब के किनारे खड़ा था।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
मुंबई की रात जब रोशनियों का ताज पहन लेती है तो यह बाज़ार और भी रंगीन हो जाता है, सड़कें जैसे रोशनी की नदियाँ बन जाती हैं, गाड़ियाँ जैसे जुगनुओं के काफिले, बुलंद इमारतें जैसे आसमान पर खड़े मीनार और इन सब के दरमियान इश्क के मुसाफिर जैसे अपनी-अपनी कहानी के किरदार। कोई किसी की आँखों में घर तलाश कर रहा है, कोई किसी की मुस्कुराहट में बहार, कोई किसी के वादे में मुस्तकबिल और कोई शायद इस लम्हे को ही पूरी ज़िंदगी समझ बैठा है।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
यहाँ हर तरफ इश्क की कश्ती है, ख्वाहिश का समुद्र है, निगाहों की लहरें हैं, वादों के बादबान हैं, कुर्बत के साहिल हैं और जज़्बात के मुसाफिर हैं मगर समुद्र की एक आदत है कि वह किसी कश्ती को हमेशा एक ही जगह नहीं रहने देता। मौज उठती है, कश्ती बहती है, मंज़र बदलता है और कभी-कभी मुसाफिर को मालूम होता है कि जिसे वह मंज़िल समझ कर निकला था वह तो सिर्फ समुद्र का एक खूबसूरत भँवर था।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔
सो मुंबई को देखिए तो यूँ महसूस होता है जैसे इश्क का एक बे-किनार मेला हो जहाँ सड़कें बाज़ार, साहिल दुकानें, निगाहें सिक्के, मुस्कुराहटें दाम, वादे सामान, दिल खरीदार और वक्त सबसे बड़ा दुकानदार जो हर शाम नई मोहब्बतें सजाकर सुबह होते ही न जाने कितनी कहानियाँ समेट लेता है।۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔