तुम क्या जानो परदेस की ज़िंदगी कैसी होती है
ख़ामा बकफ़ मोहम्मद आदिल अररियावी
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जब एक मर्द अपने घर से दूर सिर्फ़ चंद पैसे कमाने के लिए परदेस जाता है तो उसके पीछे छोड़ आने वाली दुनिया कितनी भारी होती है यह वही जानता है। तुम ने देखा होगा कि जब कोई अपने वतन से रुख़्सत होता है तो उसके घर वाले दोस्त अहबाब किस तरह उसे विदा करते हैं हर आँख अश्कबार होती है हर दिल बोझल।
मैं जब भी घर से निकलता हूँ तो अपनी अम्मी और बहनों को हमेशा रोते हुए देखा है। उन को छोड़ कर आना कोई आसान काम नहीं होता। परदेस में जा कर वो शख़्स किस तरह दिन रात मेहनत करता है यह कोई नहीं देखता। अपने हाथों से खाना बनाता है छोटे छोटे ख़र्चों को रोक कर पैसे जमा करता है और फिर वही पैसे घर भेजता है ताकि उस के अपने खुश रह सकें उन की ज़िंदगी आसान हो सके।
मगर उस के दिल में क्या चल रहा होता है? उसे हर वक़्त अपनी माँ की याद आती है, बाप की मेहनत याद आती है, बहनों के साथ हँसना खेलना, छोटी छोटी बातों पर लड़ना और फिर मान जाना यह सब यादें उस के साथ रहती हैं। लेकिन वो सब कुछ दिल में दबाए बर्दाश्त करता है, क्योंकि उसे मालूम होता है कि यह सब उसी की ज़िम्मेदारी है।
मेरे अपने दो बड़े भाई बाहर मुल्क में रहते हैं। उन के भेजे हुए पैसे तो वक़्त पर आते रहते हैं, लेकिन वो खुद तीन, चार, कभी पाँच साल बाद घर आ पाते हैं। उन की कमी हर लम्हा महसूस होती है। उन की क़ुर्बानी बहुत बड़ी है।
अगर कभी पैसे की असल अहमियत जाननी हो तो उन लोगों को देखो जो उसे मेहनत से कमाते हैं। वो लोग क्या जानें पैसे की क़द्र, जिन्हें कमाना नहीं पड़ता। असल क़द्र तो वही जानता है जो धूप, बारिश, गर्मी और सर्दी में बारह बारह घंटे मेहनत कर के एक एक रुपया कमाता है।
दुनिया में पैसा कमाना ज़रूरी है, क्योंकि इस के बग़ैर गुज़ारा मुमकिन नहीं वर्ना दूसरों के सामने हाथ फैलाते हैं । लेकिन परदेस की ज़िंदगी भी कोई आसान ज़िंदगी नहीं यह एक मीठी जेल की तरह है। इंसान जीता तो है, मगर अपने लोगों से दूर, अपनी खुशियों से दूर।
लोग अक्सर कहते हैं कि बेटियाँ पराया घर होती हैं, मगर हम जैसे बेटे भी कम पराए नहीं होते। हमें भी अपना घर छोड़ना पड़ता है, सिर्फ़ इस लिए कि एक दिन अपना घर बना सकें। इस सफ़र में कितनी अज़ीयतें, कितनी मुसीबतें और कितनी परेशानियाँ बर्दाश्त करनी पड़ती हैं, यह कोई नहीं देखता।
ख़ुदारा इन लोगों की क़द्र करो जो तुम्हारे लिए कमाते हैं, तुम्हें खिलाते हैं, तुम्हारी खुशियों के लिए अपनी खुशियाँ क़ुर्बान कर देते हैं चाहे वो बाप हो भाई हो बेटा हो या शौहर हो उन के लिए दुआएँ करो क्योंकि वही तुम्हारे असल मोहसिन होते हैं।
या अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त परदेस में सब को आसानियाँ रिज़्क़ हलाल और अपनों की मोहब्बत हमेशा नसीब फ़रमा आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन ।