एक तकलीफ़देह हक़ीक़त
दुनिया में
सबसे ज़्यादा दर्द देने वाली आवाज़ कोई शोर नहीं होती…
बल्कि वो लम्हा होता है जब औलाद अपने ही वालिदैन पर आवाज़ बुलंद करती है 
वो वालिदैन…
जो खुद भूखे रह कर तुम्हें खिलाते रहे,
जो तुम्हारी एक मुस्कराहट के लिए
 अपनी सारी खुशियाँ क़ुरबान करते रहे,
जो तुम्हारे हर दुख पर रातों को जागते रहे…
आज जब वही वालिदैन तुम से मोहब्बत भरी दो बातों के तलबगार होते हैं,
तो बदले में उन्हें तुम्हारी बदतमीज़ी, तुम्हारी चीखें और तुम्हारी बे रूख़ी मिलती है…
ज़रा सोचो…
जब माँ ख़ामोश हो कर आँसू छुपाती है,
और बाप दिल में दर्द लिए मुस्कुरा देता है
तो उन के दिल पर क्या गुज़रती होगी?
यह सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं होते,
यह उन के दिल पर लगने वाले वो ज़ख़्म होते हैं जो कभी नहीं भरते…
याद रखो,
वक़्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता…
आज तुम जवान हो, कल तुम भी इसी मुक़ाम पर खड़े होगे
और शायद तब तुम्हें एहसास होगा
मगर उस वक़्त बहुत देर हो चुकी होगी
अपने कल के लिए अपना आज बदलना होगा
आयशा ❤