सुना है बड़ी शिकायत है आपको अपनी ज़िन्दगी से



ख़ामा बकफ़ मोहम्मद आदिल अररियावी


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 ज़िन्दगी में हर इंसान को मुश्किलें, परेशानियाँ और तरह तरह की आज़माइशों से गुज़रना पड़ता है। कभी हालात अच्छे होते हैं कभी बुरे, कभी ख़ुशी नसीब होती है तो कभी ग़म का सामना करना पड़ता है। यही उतार चढ़ाव ज़िन्दगी का हिस्सा हैं और यही इंसान को मज़बूत बनाते हैं।
मगर इन आज़माइशों का यह मतलब हरगिज़ नहीं कि इंसान शिकवे शिकायतों में मुब्तिला हो जाए या ऐसी बातें ज़बान से निकाले जो न सिर्फ़ नामुनासिब हों बल्कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त को नाराज़ करने वाली भी हों। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि दुनिया में ऐसे बेशुमार लोग मौजूद हैं जो हमसे कहीं ज़्यादा मुश्किलों में ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं। कोई ऐसा है जिसके पास हाथ नहीं, कोई चल नहीं सकता, कोई बिनाई से महरूम है, और कोई बोल नहीं सकता। इसके बावजूद वो लोग अपनी ज़िन्दगी को ख़ुशी ख़ुशी गुज़ारते हैं, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का शुक्र अदा करते हैं, और सब्र के साथ हर हाल को क़ुबूल करते हैं।
इसके बरअक्स कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें मामूली सी तकलीफ़ या छोटी सी परेशानी आती है तो वो फ़ौरन नाशुक्रि शुरू कर देते हैं, मुंह से नाज़ेबा और कुफ़्रिया अल्फ़ाज़ निकालने लगते हैं, और अपनी क़िस्मत को कोसने लगते हैं। यह रवैया न सिर्फ़ ग़लत है बल्कि इंसान को अंदर से कमज़ोर भी कर देता है।
एक वाक़िया इस हक़ीक़त को ख़ूब वाज़ेह करता है। एक शख्स था जिसका एक हाथ नहीं था। वो अपनी ज़िन्दगी से इस क़दर तंग आ चुका था कि उसने फ़ैसला किया कि वो अपनी ज़िन्दगी ख़त्म कर दे गा। इसी इरादे से वो एक तालाब के किनारे पहुंचा ताकि उसमें कूद कर अपनी जान ले ले। लेकिन जैसे ही वो तालाब के क़रीब पहुंचा, उसकी नज़र एक और शख्स पर पड़ी वो शख्स ऐसा था जिसके दोनों हाथ नहीं थे मगर वो पुरसुकून अंदाज़ में अपनी ज़िन्दगी गुज़ार रहा था, बग़ैर किसी शिकायत के।
यह मंज़र देख कर पहले शख्स के दिल में एक अजीब सी कैफ़ियत पैदा हुई। उसने सोचा इस इंसान के तो दोनों हाथ नहीं हैं फिर भी यह जीने की कोशिश कर रहा है और कोई शिकायत नहीं कर रहा जबकि मेरे पास एक हाथ तो मौजूद है। मैं क्यों हिम्मत हार रहा हूं? यह सोच उसके लिए एक मोड़ साबित हुई। उसने अपना इरादा बदल दिया, तालाब से वापस लौट आया, और नए हौसले के साथ अपनी ज़िन्दगी जीने लगा।
यही दरअस्ल दुनिया की हक़ीक़त है। इंसान अक्सर दूसरों को देख कर अपनी ज़िन्दगी का अंदाज़ बदलता है। अगर वो अपने से कमज़ोर और ज़्यादा मुश्किलों में घिरे लोगों को देखे तो उसके दिल में शुक्र और सब्र पैदा होता है।
लिहाज़ा हमें चाहिए कि जो कुछ हमारे पास है, उस पर अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का शुक्र अदा करें। अपनी नेमतों की क़द्र करें, क्योंकि अगर हमने उनकी क़द्र न की तो मुमकिन है कि वो हमसे छिन जाएं, और फिर पछताने के सिवा कुछ हाथ न आए।
हमें अपनी ज़बान का भी ख़ास ख़याल रखना चाहिए। ऐसे अल्फ़ाज़ हरगिज़ न बोलें जो अल्लाह को नाराज़ करें या नाशुक्रि का इज़हार हों। ज़िन्दगी के हर हाल में चाहे ख़ुशी हो या ग़म अल्लाह का शुक्र अदा करें और उसी पर राज़ी रहें जो उसने हमें अता किया है। यही कामयाब और मुतमइन ज़िन्दगी का असल राज़ है। 
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हमें शुक्र गुज़ार बनाए नाशुक्रि से बचाए आमीन या रब्बुल आलमीन ।