*खबरदार* 

*स्टिकर्स और इमोजीस के इस्तेमाल में सावधान रहें* 

मुफ़्ती आदिल रब्बानी,
मुतख़स्सिस मरकज़ अहल-ए-सुन्नत वल जमात सरगोधा।

फेसबुक मैसेंजर या व्हाट्सएप समेत इंटरनेट की दुनिया में तरह तरह के स्टिकर्स मौजूद हैं हम इन स्टिकर्स का मतलब समझे बगैर इस्तेमाल कर रहे हैं।

कुछ स्टिकर्स और इमोजी बतौर मुसलमान इस्तेमाल करना काबिल-ए-मज़म्मत है बाज़ औकात गुनाह है।

हम वक़तन फ़ो वक़तन स्टिकर्स या इमोजी का इस्तेमाल तफ़्सीलात जाने बगैर ही करते हैं लेकिन इन चीज़ों को जानने के बाद आप कहीं भी ऐसे स्टिकर्स इमोजीस इस्तेमाल न करें यह हमारे लिए इम्तिहान है।

 
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यह दज्जाल के साथियों की एल्यूमिनी अलामतें हैं। आपको इस से बचना होगा ताकि दज्जाल की टीम का हिस्सा न बन पाएं।

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यह यहूदी तंज़ीम एल्यूमिनाटी का ताज़ीमी निशान शैतान "लुसिफर" की अलामत है। लोल का लफ़्ज़ इस्तेमाल न करें क्यों कि इस की मुकम्मल शक्ल "लुसिफर हमारा मालिक है" या "शैतान लुसिफर हमारा मालिक है"

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यह काफ़िरों और मुशरिकों के देवता की अलामत है।

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यह मादा हम जिंस परस्ती की अलामत है।

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यह मर्द हम जिंस परस्ती की अलामत है।

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यह इंतहाई अफ़सोसनाक है और फ़हशी फैलाने में तावुन का नाम है।

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यह ईसाईयों की क्रिसमस की अलामत है।

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यह गैर मुस्लिमों की दुआ की अलामत है।

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यह कुफ़्रिया शिर्किया मज़ाहिब की अलामात है।

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यह सूअर की शक्ल है।

इस्लाम में यह अलामतें किसी दूसरे के लिए बतौर तशबीह इस्तेमाल करना जायज़ नहीं है।
 

फेसबुक ने नए बैकग्राउंड्स बनाए हैं जो यहूदियों के छः कोनों वाले सितारे को प्रमोट करते हैं।

 इस के अलावा नौ मोम बत्तियों वाला बैकग्राउंड गोलाई में है। इन तमाम नए बैकग्राउंड्स को लोग बगैर सोचे समझे धड़ा धड़ इस्तेमाल कर रहे हैं। 

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बराए मेहरबानी कोई भी इमोजी या कोई भी ऐसा निशान जो आप को अच्छा लग रहा हो उसे इस्तेमाल करने से पहले उस के मुताल्लिक मालूमात ज़रूर हासिल करें। 

इन इमोजीस और निशानात बनाने वालों ने इन की बुनियाद ऐसे ऐसे वाहियात ख्यालात पर रखी है जिस के इस्तेमाल का एक मुसलमान तो क्या एक हयादार इंसान भी तसव्वुर नहीं कर सकता

 मुहब्बत के सिंबल ❤️ (दिल) के इस्तेमाल का हुक्म 🚫

❤️👉इस सिंबल का इस्तेमाल करना जायज़ नहीं है, खुसूसन अल्लाह और उस के रसूल से मुहब्बत का इज़हार करने के लिए:

📌इमाम इब्न बाज़ रहमतुल्लाह फरमाते हैं कि:
*♥️👉यह सिंबल हराम मुहब्बत का निशान और यूनानी माबूदों की अलामत है*

📚 अल-लजना अद-दाईमा लिल-इफ्ता [२०९५०]

📌अल-लजना अद-दाईमा लिल-बुहुस वल-इफ्ता से ऐसे लॉकेट के इस्तेमाल के बारे में सवाल किया गया जो दिल (❤️) की शक्ल में बने हुए होते हैं और इस में कुछ इस तरह की इबारत लिखी होती है:
(अना ❤️अर-रसूल) 
या (I❤️MOHAMMAD) 
यानी मुझे अल्लाह के रसूल ﷺ से मुहब्बत है। इसी तरह ऐसे कमीज़ के बारे में सवाल किया गया जिस में इस तरह के जुमले लिखे होते हैं ।

*🔹अल-लजना अद-दाईमा* ने जवाब दिया कि :
👈"मज़कूरा अमल को अपनाना और इस तरीका से लिखना यह सलफ उम्मत का तरीका नहीं है जो कि खैर अल-कुरून हैं और रसूल अकरम ﷺ की सब से ज़्यादा ताज़ीम करने वाले और आप ﷺ से शदीद मुहब्बत करने वाले थे।
इसी तरह इस से इन अहल-ए-फ़िस्क की मुशाबहत लाज़िम आती है जिन्होंने इन जैसे सिंबल्स को अपने हराम इश्क़ व मुहब्बत के इज़हार का ज़रिया बना लिया।
*📚 अल-लजना अद-दाईमा लिल-इफ्ता [२०९५०]*

👈इसी लिए नबी करीम ﷺ से मुहब्बत का इज़हार करने के लिए इन सिंबल्स का इस्तेमाल करना मुनासिब नहीं है, क्योंकि नबी करीम ﷺ का मक़ाम व मर्तबा इन सब चीज़ से आला व अरफ़ा है। और अल-लजना अद-दाईमा ने भी इन के इस्तेमाल से परहेज़ करने का फ़तवा जारी किया है ।
*📚 मस्तर:* 

📌आलिम-ए-नफ़सियात, अलामात व सिम्पल्स के माहिर, प्रोफेसर गाल्डिनो प्रान ज़ारोन (Galdino Pranzarone) , अमरीकी टीवी चैनल डिस्कवरी (Discovery) पर अपने एक इंटरव्यू के दौरान कहते हैं कि :
*"दो शाखों वाला रिवायती दिल (❤️) , जो आज कल मुबारक बादी के कार्ड्स में आम है , दर असल यह औरत के कूल्हों (सरीन) की शक्ल का इज़हार है जैसे वह पीछे से ज़ाहिर होते हैं।*

📌 इसी इंटरव्यू में उन्होंने यह भी कहा कि:
*👈"ख़ूबसूरती की यूनानी देवी (आफ़्रोडाइट Aphrodite) इन के नज़दीक बहुत ही हसीन व जमील थी खुसूसन इस देवी की सरीन बहुत ही ख़ूबसूरत थी, और यूनानियों ने एक मंदिर भी तामीर किया था जिस का नाम था: (अफ्रोडाइट कलिपिगोस Aphrodite Kallipygos) , जिस का लफ़्ज़ी मानी यह है: "शानदार सरीन (कूल्हों) वाली ख़ूबसूरती की देवी"* 
 
और यह तमाम बातें सिर्फ प्रोफेसर के ख्यालात नहीं हैं बल्कि इन के आसार-ए-क़दीमा से यह तमाम चीज़ें साबित होती है ।

और रोमियों ने इस को अपनी करेंसी पर इसी तरह पेश किया है। 
*📌लिहाज़ा आप लोगों को अंदाज़ा हो गया होगा कि इस सिम्पल्स (❤️) का ताल्लुक़ जिन्सियत (sex) से है, जिस के ज़रिए वह लोगों के दरमियान अपने मुख्तलिफ़ अकाइद वा अफ़्कार का इज़हार करते हैं"* इन्तही...
📚मुन्तदियात दफ़ातिर अत-तरबविया बिल-मगरिब (website) 

लिहाज़ा ज़रूरत इस बात की है कि हम हर जगह इन को इस्तेमाल करने से परहेज़ करे उमूमन" अल्लाह और उस के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही व सल्लम की मुहब्बत के लिए खुसूसन"
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 आप सब इस को रिएक्ट में देने से गुरेज़ करें।।
यह👈🩷❌ दिल नहीं है।।
🫀👉🏻 यह दिल है।
 आप फूल वगैरा दें जहां भी देना हों।।
जज़ाकमुल्लाहु खैरन कसीरा


माखूज़