अपनी बेटियों को सिखाइए…
कि मंगनी टूट जाने से ज़िंदगी की किताब बंद नहीं होती,
यह तो बस एक पृष्ठ होता है जो पलट जाता है,
और आगे बहुत से खूबसूरत अध्याय उनका इंतज़ार कर रहे होते हैं
अपनी बहनों को बताइए
कि तलाक़ कोई अंजाम नहीं, बल्कि एक नया आगाज़ भी हो सकता है,
कभी कभी अल्लाह एक रिश्ता इसलिए ख़त्म करता है
ताकि तुम्हें ऐसे सुकून से नवाज़े जिसका तुमने तसव्वुर भी न किया हो
अपनी लाडलियों को समझाइए…
कि विधवा होना ज़िंदगी के रंग ख़त्म नहीं करता,
बल्कि यह सब्र, हिम्मत और अल्लाह के क़रीब होने का एक दरवाज़ा खोल देता है,
वही अल्लाह जो छीनता है, वही बेहतर दे भी देता है
अपनी बेटियों को सिखाइए…
कि अगर कोई उन्हें रिजेक्ट कर दे
तो इसका मतलब हरगिज़ यह नहीं कि वह खूबसूरत नहीं,
याद रखें! हर फूल हर किसी के लिए नहीं होता,
कुछ खुशबूएँ खास लोगों के नसीब में लिखी जाती हैं
उन्हें यह भी सिखाइए
कि लोगों की राय से ज़्यादा अहम उनकी अपनी पहचान है,
वह अपनी क़द्र खुद पहचानें,
क्योंकि जो खुद को जान लेता है, वह कभी टूटता नहीं
उन्हें हौसला दीजिये
कि वह अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले मज़बूती से करें,
वह शिक्षा हासिल करें, अपने ख़्वाब पूरे करें,
और किसी एक रिश्ते को अपनी पूरी पहचान न बनाएँ
और सबसे अहम बात…
यह उनके दिल में बिठा दीजिये
कि
इस कायनात का मालिक, रब्बुल आलमीन,
उनसे बेइंतहा मोहब्बत करता है
वही उनका सहारा है,
वही उनका मुहाफ़िज़ है,
वह कभी अपने बंदों को तन्हा नहीं छोड़ता
लिहाज़ा
अपनी बेटियों को मज़बूत बनाइए
उन्हें जीना सिखाइए,
उन्हें मुस्कुराना सिखाइए,
उन्हें गिर कर संभलना सिखाइए
ताकि वह सिर्फ़ साँस न लें,
बल्कि पूरी शान के साथ जिएँ,
और कभी भी “ज़िंदा लाश” न बनें
आयशा ❤