वक़्त क्या है.. वक़्त एक मौका है, मोहलत है
वक़्त वो है जिसे गँवाना आसान है
वक़्त वो है जिसके गुज़रने से इंसान हैरान है
वक़्त वो है जो हर एक का मेहमान है
और वक़्त एक इबरत का निशान है
हर दिन नया दिन होता है इंसान इसके अंदर जो आमाल कर ले वो महफूज़ हो जाता है और जो हासिल कर ले वो महफूज़ हो जाता है फिर ये दिन तो क्या इसका एक लम्हा भी ता क़यामत मयस्सर नहीं आने वाला
हर दिन हर पल हर घड़ी कीमती जवाहरात से कहीं ज़्यादा कीमती और क़ाबिल-ए-क़द्र है
वक़्त बर्फ की तरह है बल्कि इससे भी ज़्यादा नज़ाकत लिए हुए
बर्फ तो पिघल कर पानी बन जाता है मख़सूस टेम्परेचर पर
मगर वक़्त इस तरह पिघलता है कि एहसास भी नहीं हो पाता और न हम इसे रोकने की ताक़त रखते हैं न पकड़ने पर क़ुदरत
और इसी तरह हमारी उम्र वक़्त के हर सेकंड के साथ गुज़रती चली जाती है
मगर क़ुदरत का इंसाफ़ तो देखें कि वक़्त के बारे में कैसी बराबरी रखी
ग़रीब, अमीर, ज़ईफ़, नादार, नौजवान, बच्चे,
मर्द, औरत, अक़लमंद, नादान, सबको यकसाँ मोहलत मिली
हर एक को चौबीस घंटे मसावी तौर पर मिले हैं
सिर्फ़ ज़रूरत इस बात की है कि हम इसे बेहतर तरीक़े से इस्तेमाल कर सकें
अगर यूँही काम को बिला वजह मुलतवी करते रहे कभी फ़ज़ूल मजलिसों में बैठ कर, कभी बातें करके, कभी नफ़्स के हाथों
तो याद रहे कि देखते ही देखते हम क़ब्र में होंगे और जिस अदम-ए-फ़ुर्सत के शिकवे दुनिया में करते थे वो भी मौजूद होगी
बावजूद ये कि ये काम करने का मौका, आख़िरत बनाने का मौका ये मोहलत ये नेमत आप से जुदा हो चुकी होगी
इसलिए ख़ुदारा वक़्त रहते हुए वक़्त की क़द्र कर लें
अल्लाह हमें वक़्त को अपनी रज़ामंदी वाले कामों में इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ मरहमत फ़रमाए.. आमीन या रब्बुल आलमीन