कभी तुम्हारा ईमान उहद पहाड़ की तरह मज़बूत 
और कभी मकड़ी के जाले की तरह कमज़ोर हो जाता है ।

थकना नहीं , बस कोशिश करते रहना है 

हर रोज़ नमाज़ पढ़नी है 

चाहे दिल लगे या ना लगे 

तिलावत करनी है चाहे दिल राज़ी हो या ना हो ।

अज़कार करने हैं , चाहे जितने मसरूफ़ हो। 

नफ़सानी ख़्वाहिशात के पीछे चलने से खुद को बचाना है ।
अल्लाह ताला से जुड़ने की कोशिश करनी है ।

हर दिन ,हर लम्हा हर रोज़ शैतान को हराने की
 कोशिश करनी है।

आज़माईश आये गी 
मगर इस पर साबित क़दम रहना है ।

दिल हज़ार बार टूटेगा ।
सब्र आज़माया जाए गा ।

इम्तिहान में डाला जाए गा 
लेकिन यह वक़्त भी गुज़र जाए गा ।
इन्शाअल्लाह 

अनमोल ✍️