सफलता तो काम से होगी, न कि हुस्न-ए-कलाम से होगी
ज़िक्र के इल्तिज़ाम से होगी, फ़िक्र के एहतिमाम से होगी।
यह वक़्त इम्तिहाँ था, यह घड़ी मुश्किल की थी मगर मेहनत की शमा हर दिल में जलती रही न नींदों का ख़याल रहा, न आराम की तलब जिन्होनें सब्र को अपनाया, कामयाबी उन्हीं से मिली।