हम हर जगह नाकाम क्यों हैं
हम रुसवा क्यों हैं 
क्या आपने कभी यह सोचा 
हमारा माजी शानदार था
हम हर जगह कामयाब थे
दुनिया भर के 
 अक़्ल मंद
दानिशवर 
मुफ़क्किर
माल दार
हमारे कदमों में बैठते
बड़े बड़े शहंशाह 
अगर हमें तोहफ़ा में खुशबू भेजते
तो हम उसे मिट्टी में मिला कर 
मस्जिद की दीवारों को लीप कर देते
ताक़तवर तरीन लोग हम से 
मुंह छुपाते
अगर हम जंग के मैदान में उतरते
तो फ़रिश्ते क़तार अंदर क़तार नाज़िल होते
आखिर हम बेबस क्यों हैं
हम लाचार क्यों हैं 
हम मजबूर क्यों हैं 
क्योंकि हम ने मुकम्मल शरीयत पर अमल नहीं किया 
हम ने
हुब्ब फ़िल्लाह  
का दरस दिया
बुग्ज़ फ़िल्लाह
को तर्क कर दिया 
हम ने 
वमन अहसनु क़ौलम मिम्मन दआ इलल्लाहि व अमिला सालिहंव व क़ाला इन्ननी मिनल मुस्लिमीन" 
पर अमल किया मगर
उज़िन लिल्लज़ीना युक़ातिलूना बिअन्नहुम ज़ुलिमू
को छोड़ दिया 
कुतिबा अलैकुमुस सियाम 
को पकड़ा
कुतिबा अलैकुमुल क़िताल 
को तर्क कर दिया
अल्लाह ताला का फरमान है 
अफ्तुअमिनूना बिबअज़िल किताबी व तकफुरूना बिबअज़ 
तो ऐसी सूरत में 
हम शायद रुसवा ही होंगे
आइए अहद करते हैं कि
पूरी किताब अल्लाह पर ईमान लाएंगे 
और पूरी शरीयत पर अमल करेंगे 

बक़लम
तूफ़ान अहमरी