जी बिल्कुल
इसमें कोई शक नहीं कि बा'ज़ जिन्नात इंसानों को तकलीफ पहुंचाते हैं अगर अल्लाह तआला मुहाफ़िज़ फ़रिश्तों को मुक़र्रर न करता तो जिन्नात और शैतान के शर से कोई महफ़ूज़ न रहता इसलिए कि न तो जिन्नात व शैतान इंसानों को नज़र आते हैं और अल्लाह ने उनको तेज़ी के साथ हरकत करने और चलने की ताक़त दी है। फिर भी बा'ज़ जिन्नात इंसान को तकलीफ पहुंचाते हैं या तो इस वजह से कि इंसान ने उस जिन को तकलीफ पहुंचाई है जैसे बे-ख़बरी में जिन्नात पर गरम पानी डाल दिया या बे-ख़बरी में उन पर पेशाब कर दिया या बे-ख़बरी में जिन्नातों के घर में दाखिल हो गया तो इन सब बातों की वजह से जिन्नात इंसानों को तकलीफ पहुंचाते हैं और कभी बगैर वजह के भी ज़ुल्म के तौर पर बा'ज़ जिन्नात इंसान को तकलीफ पहुंचाते हैं जैसा कि इंसान इंसान पर ज़ुल्म करता है और भी जिन्नात इस वजह से तकलीफ पहुंचाते हैं कि इंसान ने बे-ख़बरी में किसी जिन को मार दिया तो जिन्नात भी इससे इंतकाम ले कर उसको हलाक कर देते हैं जैसा कि हदीस में है कि नौजवान सहाबी ने सांप को नेज़ा में पिरो कर दीवार में गाड़ दिया तो जिन्नातों ने फ़ौरन इंतकाम ले कर उस सहाबी को हलाक कर दिया यहां तक कि यह भी पता न चला कि सांप पहले मरा या नौजवान सहाबी पहले मरे ...