रमजान मुबारक बेशुमार रहमतों, बरकतों वाला महीना है जो अभी चंद दिनों पहले ही हम पर साया फगन हुआ था हम तो अभी रमजान की खुशियाँ मनाने में लगे थे कि देखते ही देखते यह महीना तेज़ी से गुज़र गया कब निस्फ़ हुआ और कब हम आख़िरी अशरे में दाखिल हो गये पता ही नहीं चला और यह माह मुबारक हम से रुख़सत होने को है और जाते जाते भी यह माह हमारे लिये बख़्शिश का परवाना लिये खड़ा मुंतज़िर है कि कब कौन इस मौके़ को गनीमत जाने और अपनी बख़्शिश करवा ले लेकिन अफ़सोस हम मुसलमान तो इस आख़िरी और कीमती अशरे को ईद की तैयारियों की नज़र कर देते हैं पूरा महीना इफ़्तार स्पेशल पकवान बनाने में लगा देते हैं और जब माह रमजान की आख़िरी घड़ियों में पहुँचते हैं तो इफ़्तार के साथ साथ ईद की तैयारियों में तेज़ी से लग जाते हैं जबकि हमें इबादतों में और तेज़ी लानी चाहिये लेकिन हम पिछले दिनों इबादतें कर के इन आख़िरी अय्याम में सुस्ती का मुज़ाहरा करने लगते हैं और इसे सहर व इफ़्तार और ईद की तैयारियों में ज़ाया कर देते हैं आह अफ़सोस! काश हम समझते होते काश हम ने ईद की तैयारियाँ रमजान से चंद दिन क़ब्ल ही कर ली होती और माह मुबारक के इन आख़िरी अय्याम को हम सिर्फ़ इबादत में लगाते हम अपने लिये आखिरत का सामान कर लेते किसे पता अगले रमजान कौन हो कौन नहीं याद रखिये कि अगर इन थोड़े दिनों में हम ने शब-ए-क़द्र को पा लिया और अल्लाह से अपनी बख़्शिश करवा ली, अल्लाह की जन्नत को पा लिया तो फिर आखिरत में हमारा हर दिन ईद के जैसा होगा लेकिन अगर हम महरूम रह गये तो हम बस नये कपड़ों नये जूतों और ईद की खुशियाँ तो मना लेंगे लेकिन फिर हम अबदी खुशी से महरूम हो जायेंगे इस अशरे में अल्लाह ने अपने बंदों को बेहतरीन मौका दिया है एक रात की इबादत को 83 साल की इबादत का सवाब अल्लाह अकबर किसी और उम्मत को ऐसी बशारत नहीं मिली रब ने सिर्फ़ अपने प्यारे महबूब की उम्मत को यह एज़ाज़ बख़्शा है आख़िरी अशरे में एतकाफ़ करने का हुक्म मिला ताकि ज़्यादा से ज़्यादा इबादत हो सके ज़्यादा से ज़्यादा नेकी कमाने का मौका मिले और हम इन कीमती साअतों को बाज़ारों में बर्बाद कर रहे हैं खुदारा अपनी आखिरत सँवार लें आज तेईसवीं शब-ए-क़द्र है और शब-ए-जुमा भी आइये हम ग़फ़लत व सुस्ती को छोड़ कर कुछ देर इबादतों में खुद को थका कर अल्लाह की जन्नत के हक़दार बन जायें क्या ही अच्छा सौदा है चंद घंटों की नींद की क़ुर्बानी और बदले में हमेशा की जन्नत, अल्लाह का दीदार अल्लाह अकबर...
अल्लाह हम सब की मग़फ़िरत फरमाये अल्लाह हमें इन में शामिल फरमाये जिन की अल्लाह इस रात मग़फ़िरत फरमाने वाला है
अस्तग़फिर अल्लाह रब्बी मिन कुल्ले ज़म्बिन व अतूबु इलैह
💫बिन्त-ए-शहाब✍🏻