क्या पीरियड्स में मारिफुल कुरान को छू सकते हैं?
मारिफुल कुरान एक तफ़सीर है, खालिस मुसहफ़ (सिर्फ़ कुरान-ए-मजीद) नहीं।
*फ़िक़्ह-ए-हनफ़ी में हुक्म यह है कि:*
हाइज़ा औरत के लिए खालिस कुरान-ए-मजीद (मुसहफ़) को छूना जायज़ नहीं।
लेकिन अगर किसी किताब में तफ़सीर ज़्यादा हो और कुरान का मतन कम हो तो उस किताब को छूना जायज़ है, लेकिन ख़याल रखें कि आयतों को हाथ न लगाए।
दलील:
अद-दुर्र अल-मुख़्तार में है:
> ويجوز مس كتب التفسير إن كان التفسير أكثر
और रद्द अल-मुहतार में इसकी तफ़सील मौजूद है।
चूंकि मारिफुल कुरान में तफ़सीर की मिक़दार कुरान के मतन से बहुत ज़्यादा है, इसलिए इसे हाथ लगाना जायज़ है।
*क्या हाथ में ले कर पढ़ सकते हैं?*
जी हां, तफ़सीर पढ़ना जायज़ है। लेकिन आयतों पर हाथ न लगे।
अलबत्ता:
आयात-ए-कुरानी बतौरे तिलावत पढ़ना हाइज़ा के लिए जायज़ नहीं।
अगर आयत को तफ़सीर की नीयत से तोड़ तोड़ कर या दुआ की नीयत से पढ़ा जाए तो गुंजाइश है (बा'ज़ फुक़हा के नज़दीक)।
हवाला:
अल-हिदाया
बदाइ' अल-सनाइ'
वल्लाहू आलम बिस्सवाब