मोहब्बत क्या है?

आइए आज आपको मोहब्बत के उनवान से कुछ वाक़यात सुनाते हैं। क्या आप जानते हैं मोहब्बत क्या है? 
मोहब्बत तो यह है
जब हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ी अल्लाहु अन्हु को एक सहाबी ने रोते हुए देखा पूछा अबू बक्र आपको किस चीज़ ने रुलाया है जवाब दिया मैंने हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को रोते देखा है इसलिए रो रहा हूँ

मोहब्बत तो यह है
जब बनी दीनार की एक औरत का शौहर भाई और बेटा ग़ज़वा-ए-उहद में शहीद हुए और उसे इसकी खबर मिली और वह बार बार नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का पूछती यहाँ तक कि जब उसने आपको बा हालत हयात पाया तो कहने लगी आप हयात हैं तो हर मुसीबत हल्की है

मोहब्बत तो यह है कि
जो हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत आइशा सिद्दीक़ा रज़ी अल्लाहु अन्हा के बारे में फरमाया
मुझे आइशा के बारे में तकलीफ़ न दो

मोहब्बत तो यह है कि
जब हिजरत के मौके पर ग़ार में दाख़िले के वक़्त सिद्दीक़ अकबर ने यह कह कर हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को दाखिल होने से रोक दिया मैं पहले जाऊँगा कहीं इसमें मौजूद कोई चीज़ आपकी ईज़ा रसाई का सबब न बने

मोहब्बत तो यह है कि 
जब हज़रत बिलाल हब्शी रज़ी अल्लाहु अन्हु को फतह बैतुल मुक़द्दस के मौके पर हज़रत उमर रज़ी अल्लाहु अन्हु ने अज़ान का कहा उन्होंने अज़ान शुरू की जब أشهد أن محمدا رسول الله
पर पहुँचे तो इस क़दर रोए कि इससे पहले इतना कभी न रोए थे

मोहब्बत तो यह है कि
जब हज़रत सौबान रज़ी अल्लाहु अन्हु से हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने पूछा कि आपके चेहरे का रंग क्यों बदला हुआ है उन्होंने जवाब दिया या रसूल अल्लाह मुझे कोई तकलीफ़ और बीमारी नहीं है। मैं जब तक आप का चेहरा अनवर न देख लूँ तो वहशत ज़दा रहता हूँ

मोहब्बत तो यह है कि 
रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रबीआ बिन काब से पूछा आप की कोई हाजत है तो बयान करें। उन्होंने अर्ज़ की या रसूल अल्लाह फ़क़त जन्नत में आप का साथ चाहता हूँ।।।
 आइशा ❤