(5) مضمون
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
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कलम से महमूदुलबारी
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: बीवी — सबसे बड़ी नेमत या सबसे बड़ी आज़माइश
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अलहमदुलिल्लाह! नहमुदुहु व नस्तईनुहु व नस्तग़फिरुहु, व नऊज़ु बिल्लाहि मिन शूरूरी अनफुसिना व मिन सय्यिआती आमालना, मन यहदिहिल्लाहु फला मुज़िल्ला लहू, व मन युज़लिल फला हादी लहू।
व अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहु ला शरीका लहू, व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू।
मुअज़्ज़ज़ कारीईन किराम;;
अल्लाह रब्बुल इज्ज़त ने इंसान की ज़िंदगी को सुकून व इतमीनान के लिए बनाया है, और इस सुकून की सबसे बड़ी बुनियाद "मियां बीवी का रिश्ता" है। यही वजह है कि कुरान में अल्लाह तआला ने इरशाद फरमाया:
﴿वमिन आयातिही अन ख़लक़ा लकुम मिंन अनफुसिकुम अज़वाजन लितस्कुनू इलैहा व जअला बैनकुम मवद्दतन व रहमतन﴾
(अर-रूम: 21)
"और उसकी निशानियों में से है कि उसने तुम्हारे लिए तुम ही में से बीवियां पैदा कीं ताकि तुम उनसे सुकून पाओ और तुम्हारे दरमियान मोहब्बत और रहमत रखी।"
;; बीवी सबसे बड़ी नेमत;;
नबी अकरम ﷺ ने फरमाया:
"अद-दुनिया मताउन व खैरू मताइहा अल-मरअतु अस-सालिहा"
(मुस्लिम)
"दुनिया सामान है और दुनिया का सबसे बेहतरीन सामान नेक बीवी है।"
नेक बीवी शौहर के लिए सुकून है, उसके दीन में मददगार है, उसकी इज्जत व गैरत की मुहाफ़िज़ है, उसके बच्चों की बेहतरीन तरबियत करने वाली है। नेक बीवी के बारे में कहा गया है कि वह शौहर के लिए दुनिया व आखिरत की कामयाबी का जरिया है।
हज़रत उमर बिन खत्ताब रज़ी अल्लाहु अन्हु फरमाया करते थे:
"नेक बीवी शौहर के लिए ज़िंदगी की सबसे बड़ी राहत है, क्योंकि वह घर में सुकून देती है और दीन में मज़बूती पैदा करती है।"
वाकयाते सहाबा किरामؓ
हज़रत उमरؓ का सब्र;;
एक शख्स हज़रत उमरؓ के पास आया और कहा: "अमीरुल मोमिनीन! मेरी बीवी बदज़बान है।" हज़रत उमरؓ ने फरमाया: "बीवी तुम्हारे लिए सुकून है, तुम्हारे खाने की पकाने वाली है, बच्चों की परवरिश करने वाली है। अगर कभी जबान से सख्त बात कर भी दे तो बर्दाश्त कर लो।"
यह सब्र और शुक्र की तालीम है।
हज़रत अबू दरदाؓ और हज़रत उम्म दरदाؓ
उम्म दरदाؓ ने शौहर को याद दिलाया कि इबादत के साथ साथ बीवी के हुकूक भी हैं। नबी करीम ﷺ ने इसकी ताईद फरमाई। यह नेक बीवी की रहनुमाई है।
हज़रत अलीؓ और हज़रत फातिमाؓ
हज़रत फातिमाؓ घर का काम करतीं, हाथ छिल जाते, लेकिन शिकायत नहीं करतीं। यह शौहर के साथ सब्र और कनाअत की आला मिसाल है।
बीवी सबसे बड़ी आज़माइश
लेकिन अगर बीवी बदज़बान, दीन से गाफिल और दुनिया परस्त हो तो वह शौहर के लिए सबसे बड़ी आज़माइश बन जाती है। कुरान में साफ इरशाद है:
﴿इन्ना मिन अज़वाजिकुम व औलादिकुम अदुव्वन लकुम फाहज़रूहुम﴾
(अत-तगाबुन: 14)
"बेशक तुम्हारी बीवियों और औलाद में से बाज़ तुम्हारे दुश्मन भी हैं, पस उनसे बचो।"
यहां दुश्मनी से मुराद यह नहीं कि वह कत्ल व किताल करे, बल्कि दुश्मनी यह है कि वह दीन की राह से हटा दे, शौहर को अल्लाह की याद से गाफिल कर दे, और उसे गुनाह पर मजबूर कर दे।
नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
"इन्नमा अद-दुनिया हलवातुन खज़रतुन, व इन्नल्लाहा मुस्तखलिफुकुम फीहा, फयन्ज़ुरु कैफा तअमलून, फत्तकु अद-दुनिया वत्तकु अन-निसा"
(मुस्लिम)
"दुनिया मीठी और सब्ज़ (दिल को लुभाने वाली) है, अल्लाह तआला देखेगा कि तुम इसमें कैसे अमल करते हो, लिहाजा दुनिया से बचो और औरतों के फितने से बचो।"
हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम का सब्र
उनकी बीवी ने बाज़ औकात कमज़ोरी दिखाई, लेकिन अय्यूबؑ ने सब्र किया। अल्लाह ने आखिरकार दोनों को रहमत अता की।
हज़रत नूहؑ और हज़रत लूतؑ की बीवियां
कुरान ने इन दोनों की बीवियों को मिसाल बना कर कहा कि वह शौहरों के साथ रह कर भी काफिर रह गईं। यह बताता है कि बुरी बीवी शौहर के लिए आज़माइश है
हज़रत उमरؓ का कौल
आप फरमाते थे: "बुरी बीवी मर्द के लिए दुनिया में सबसे बड़ी मुसीबत है।"
नेक बीवी की निशानियां:
नमाज़ व रोज़े की पाबंद हो
शौहर की इज्जत व वकार की मुहाफ़िज़ हो
हलाल पर कनाअत करे
शौहर को दीन की याद दिलाए
बुरी बीवी की निशानियां:
ज़बान दराज़ हो
शौहर को हराम की तरफ धकेले
दुनिया के मुतालबात में उलझाए
दीन से गाफिल करे
सलफ सालेहीन के अकवाल
इमाम हसन बसरीؒ फरमाते हैं: "नेक बीवी शौहर के दीन में मददगार है।"
एक बुजुर्ग ने कहा: "बीवी अगर नेक हो तो घर जन्नत का बाग है, और अगर बुरी हो तो घर जहन्नम का टुकड़ा है।"
असल मेयार
अब सवाल यह है कि बीवी नेमत है या आज़माइश?
अगर वह शौहर के साथ दीन में मददगार है → तो वह सबसे बड़ी नेमत है।
अगर वह दुनिया के पीछे लगा कर आखिरत भुला देती है → तो वह सबसे बड़ी आज़माइश है।
अगर वह नेक सीरत है → तो वह जन्नत की ज़मानत है।
अगर वह बदज़बान और दीन से गाफिल है → तो वह जहन्नम का दरवाजा खोलने वाली है।
इसीलिए रसूल अल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"औरत से निकाह चार चीजों पर किया जाता है: माल, हसब व नसब, हुस्न और दीन। पस तुम दीनदार को तरजीह दो ताकि कामयाब रहो।"
(बुखारी व मुस्लिम)
नतीजा और नसीहत
मेरे मोहतरम भाइयो!
बीवी अगर नेक हो तो यह अल्लाह की अज़ीम नेमत है, और अगर दीन से गाफिल हो तो यह इंसान के लिए सबसे बड़ी आज़माइश है।
इसलिए हर मुसलमान को चाहिए कि निकाह के वक्त दीन को तरजीह दे, और शादी के बाद बीवी की इस्लाह और तरबियत करे। क्योंकि नेक बीवी न सिर्फ घर को जन्नत बनाती है बल्कि शौहर को आखिरत में भी कामयाब करती है।
अल्लाह तआला हम सब को नेक बीवियों और नेक खानदान की नेमत अता फरमाए, और अगर कभी बीवी या औलाद आज़माइश बन जाएं तो हमें सब्र व हिकमत के साथ दीन पर कायम रहने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।