ताकतवर औरत से ताकतवर समाज बनेगा



नहमदुहू व नुसल्ली अला रसूलिहिल करीम (अम्मा बाद)
अऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
व मंय्यअमल मिनस सालेहाति मिन जकरिन औ उंसा व हुवा मुअमिनुन फ उलाइका यदखुलूनल जन्नता व ला युजलमून नकीरा (सदकल्लाहुल अजीम)
कालन्नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खैरू मताअद दुनिया अल मरअतुस सालेहा
(औ कमा काला अलैहिस्सलातु वस सलाम)

आज वक्त के अहम तकाजे पर इस्लाह ए मुआशरा से मुंसलिक ऐसे नाजुक मौके पर मैं एक संवेदनशील विषय लेकर आपके सामने तशरीफ फरमा हूं अल्लाह पाक से दुआ करती हूं कि मुझे विषय का मुकम्मल हक अदा करने की तौफीक अता फरमाए आमीन
देखिए हर चीज की एक असल होती है मिसाल के तौर पर दरख्त की असल बीज है दरख्त पर हर वक्त का फल आना मुश्किल तब होता है जब उस दरख्त की अच्छी देख भाल ना की जाए इसी तरह दरख्त उस वक्त तक उरूज पजीर नहीं हो सकता तब तक पौधे की हालत में उसको सही ढाला ना जाए और वह पौधा उस वक्त नहीं उग सकता तब तक बीज सही ना हो जाए और बीज उस वक्त तक पौधे की पैदाइश नहीं दे सकती तब तक उसको खेती दान जमीन में ना बोया जाए इसी लिए हर चीज का हुस्न अंजाम की असल उसकी जड़ का हसीन आगाज होता है इसी तरह माहौल और मुआशरा एक इंसानी जिंदगी का अहम हिस्सा है और इसकी दुरुस्तगी और बिगाड़ का सबब एक औरत के हिस्से में रखा गया है जिस खानदान की औरत बा अखलाक होती है उस का खानदान बा अखलाक होने का तसव्वुर किया जाता है और जिस मां में खुल्के हुस्ना उसकी औलादों में अच्छे किरदार वाला पैदा हो सकता है और जिस बस्ती में नेक खातून का साया हो उसकी फिक्र तड़प से उस बस्ती के सुधरने का इमकान मिलता है औरत को अल्लाह ने जिस्मानी तौर पर जितना नाजुक और मासूम बनाया है उतना ही किरदार में मजबूत और मुस्तहकम भी बनाया है अल्लाह के पास कवी बाजु रखने वाले एतबार नहीं है कवी किरदार रखने का एतबार होता है कौम को मजबूत व मुस्तहकम बनाने के लिए काजी के हिदायात से ज्यादा औरत की मोमिनाना सिफात मददगार साबित होती है
याद रखिए! औरत का किरदार जितना पाक होगा मुआशरा उतना पाकीजा रहेगा
औरत के अजाइम जितने कवी होंगे कौम उतनी बुलंदी पर होगी
औरत जितना संवर कर जिंदगी गुजारेगी माहौल उतना सुधरेगा
औरत की नियतों का कमाल वक्त को पलट कर रख देता है
औरत जितनी कवी होगी माहौल और मुआशरत उतना कवी होगा
औरत और मर्द में मर्तबा और कुव्वत के ऐतबार से मर्द को कव्वाम कहा गया है हाकिम बनाया गया है
औरत हाकिम तो बन नहीं सकती लेकिन हाकिम बना सकती है
औरत मालिक तो बन नहीं सकती लेकिन मालिक बना सकती है
औरत काजी तो नहीं बन सकती लेकिन काजी बना सकती है
औरत हुकूमत तो कर नहीं सकती हुकूमत करवा सकती है

औरत का कमाल औलाद की अच्छी तरबियत में छुपा है
औरत का जमाल शौहर की मदद में छुपा है
औरत की मिसाल बेटी का किरदार अदा करने में छुपा है
औरत की खिसाल अच्छी नीयत अच्छी फिक्र इताअत व हिफाजत में तरबियत में छुपा है
अगर औरत अपने चारों सिफात से हट गई तो इसमें सिर्फ औरत के लिए जवाल है जवाल है जवाल है
और फिर औरत सब के लिए वबाल है वबाल है वबाल है
औरत को चाहिए कि जिस्मानी ऐतबार से भी ताकतवर रहे रूहानी ऐतबार से भी ताकतवर रहे मैं आपको ताकतवर खवातीन के सिलसिले में मौजूदा दौर और साबिका दौर की चंद तस्वीरें मुख्तलिफा बताती चलूं कि
मौजूदा दौर की बहादुर खवातीन वह मानी जाती है
जो कॉलेज में पढ़ी लिखी हो
जो किसी जॉब पर फाइज हो चुकी हो
जो डॉक्टर बनी हो
जो इंजीनियर बनी हो
जो ऑफिसर बनी हो
जो फौजी बनी हो
जो पुलिस बनी हो
जो एडवोकेट बनी हो
जो वकील बनी हो
जो फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाली बनी हो वगैरा वगैरा
चाहे वह यह ओहदा किरदार बेच कर पाया हो इज्जत लुटा कर पाई हो बे पर्दगी से हासिल की हो बे हयाई से हासिल की हो इसको मुकम्मल तौर पर नजर अंदाज किया जाएगा
और आज की मासूम और कमजोर खातून वह मानी जाती है
जो मदरसे में पढ़ती हो
जो मदरसे से फारिगा हो
जो मदरसे की आलिमा हो
जो मदरसे की मुअल्लिमा हो
जो मदरसे से वाबस्तगी रखती हो
आज के मुआशरे में इसको निजी निगाहों से देखा जा रहा है मदरसे की कई तालिबात अपने आप को कम तर व कम हैसियत जानती है हालांकि उनको मालूम नहीं कि दुनियावी इल्म इज्जतों वाला है या दीन इल्म इज्जतों वाला है
याद रखिए साबिका जमाने पर जब हमारी निगाह पड़ती है तो कई नेक खवातीन के किरदार और औसाफ हमारी निगाहों को चीर कर रख देते हैं औरतें भी ऐसी आला किस्म के ईमान पर फाइज थीं दीन की ताबे थीं
वक्त की जाहिदा थीं
खुदा की आशिका थीं
रसूल अल्लाह की जाइरा थीं
रात की आबिदा थीं
दिन की साइमा थीं
और ऐसा ऐसा ईमान उनका था कि सुबह से शाम तक एक कुरान मजीद मुकम्मल करती थीं
और जब रात के अव्वल हिस्से में नमाज के लिए ठहर जाती थीं तो करीब अल फजर पर सलाम फेरती थीं खुदा के खौफ से इस कदर रोती थीं कि आंखें अंदर धंस जाती थीं
आप सहाबा के जमाने में नजर डालते हैं तो ऐसी ऐसी अजीमुश्शान खवातीन सहाबियात का किरदार आपकी आंखें चीर कर रख देता है ताबेईन के दौर को पढ़ते हैं तो आंखें अश्कबार हो जाती हैं इससे आपको अंदाजा लगाना होगा खवातीन का किरदार कैसा है और कैसा होना चाहिए था
इसलिए कौम की बुनियाद औरत को बनाया गया
औरत का कवी होना कौम का कवी होना है
औरत का कवी होना मुआशरे का कवी होना है
औरत का कवी होना कबीले का कवी होना है
औरत का कवी होना खानदान का कवी होना है
लिहाजा ईमानी कुव्वत
दीनी कुव्वत
इस्लामी कुव्वत
जिस्मानी कुव्वत
रूहानी कुव्वत
हर किस्म की कुव्वत से हर लड़की हर तालिबा हर मां हर बहन हर बेटी अपने आप को कवी बनाने की फिक्र करे मजबूत बनाने की कोशिश करें मुस्तहकम बनने की सई करें जिससे पहले खुद को भी फायदा होगा और साथ ही साथ सारी उम्मत को भी आपकी कुव्वत व सेहत से फायदा पहुंचेगा
अल्लाह पाक हम सब को कवी ईमान मुस्तहकम निजाम का पाबंद बनाएं और एक बा सलाहियत सालेहा किरदार की मलिका बनाएं जिससे कौम मुल्क की मदद कर सके आमीन सुम्मा आमीन

व आखिर दअवाना अनिल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
जजाकमुल्लाहु खैरा फिद दारेन

बनोक कलम फिरदौस जहां मजाहिरी नुमानी
(खादिमा मदरसा हिब्बतुर रहमान लिबनात)