हज और उमराह की सआदत के लिए वज़ीफ़ा — मुजर्रब अमल, सच्ची रिवायत
तहरीर। मौलाना मुहम्मद ज़ुबैर अहमद दरख्वास्ती हसन अब्दाल
आज राक़िमुल हुरूफ़ को हज़रत मौलाना हुसैन अहमद तारिक़ साहब से मुलाक़ात का शरफ़ हासिल हुआ। आप हज बैतुल्लाह के सफ़र पर रवाना हो रहे थे। मैं ने उन से दरख्वास्त की कि मेरे लिए भी दुआ फरमाएं कि अल्लाह तआला मुझे भी हज व उमराह की सआदत अता फरमाए।
हज़रत ने न सिर्फ़ दुआ फरमाई बल्कि एक ईमान अफ़रोज़ वाक़िया भी सुनाया:
उन्होंने फरमाया:
> "मौलाना ग़ुलाम अहमद साहब रहमतुल्लाह अलैह के ज़माने में अल-मदीना मस्जिद में एक जलसा था। इस में हज़रत मौलाना सैफ़ुर रहमान दरख्वास्ती साहब मदज़िल्लाहुल आली (हाफ़िज़ुल हदीस हज़रत मौलाना अब्दुल्लाह दरख्वास्ती रहमतुल्लाह अलैह के नवासे) तशरीफ़ लाए और बयान में अपने नाना का एक मुजर्रब वज़ीफ़ा सुनाया:
हज़रत अब्दुल्लाह दरख्वास्ती रहमतुल्लाह अलैह फरमाया करते थे:
> ‘जो शख़्स रोज़ाना 💯 मर्तबा दरूद शरीफ़ और 💯 मर्तबा यह कलिमा पढ़े:
اللّٰهُ اللّٰهُ رَبِّي لَا أُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا
इसे इन शा अल्लाह हर साल हज व उमराह की सआदत नसीब होगी।’
हज़रत सैफ़ुर रहमान दरख्वास्ती साहब ने फरमाया कि: "मैं ने अपने नाना से यह बात उन्नीस (19) साल की उम्र में सुनी, उस वक़्त से ले कर अब तक अल्हम्दुलिल्लाह मुसलसल छत्तीस (36) साल से हर साल हज और मुतअद्दिद उमरे की सआदत हासिल कर रहा हूँ।"
इस बात से मुतास्सिर हो कर मौलाना हुसैन अहमद तारिक़ साहब ने भी यह वज़ीफ़ा शुरू किया। आप फरमाते हैं:
"अल्लाह के फ़ज़ल से मुझे भी हज व उमरे की सआदत हासिल हुई, और जब तीसरी बार उमरा के लिए हरम नबवी में गया तो हज़रत मौलाना सैफ़ुर रहमान दरख्वास्ती साहब से मुलाक़ात हुई। मैं ने अर्ज़ किया कि हज़रत, आप के बताए हुए वज़ीफ़ा की बरकत से तीसरी बार उमरा की सआदत मिली है।"
हज़रत ने फ़ौरन दो बच्चों को बुलाया: ज़करिया और यहया, और उन से कहा: "बेटा! बताओ तुम कौन सा वज़ीफ़ा करते हो?"
इन मासूम बच्चों ने जवाब दिया:
"हम रोज़ाना 💯 मर्तबा दरूद शरीफ़ और 💯 मर्तबा यह पढ़ते हैं:
اللّٰهُ اللّٰهُ رَبِّي لَا أُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا"
हज़रत ने मुस्कुरा कर फरमाया:
> "देखो! यह बच्चे भी इसी वज़ीफ़े की बरकत से आज यहां (मदीना मुनव्वरा) मौजूद हैं।"
🌹 लिहाज़ा तमाम बहन भाइयों, ख़वातीन, बच्चों और बुज़ुर्गों से दरख्वास्त है कि इस मुजर्रब वज़ीफ़े को मामूल बना लें।
📿 मुजर्रब वज़ीफ़ा बराए हज व उमराह:
📌 रोज़ाना 100 मर्तबा दरूद शरीफ़
📌 रोज़ाना 100 मर्तबा:
> اللّٰهُ اللّٰهُ رَبِّي لَا أُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا
💠 बेहतर है दरूद शरीफ़ यह पढ़ा जाए:
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ أَفْضَلَ صَلَاتِكَ
🌟 इन शा अल्लाह सुम्मा इन शा अल्लाह!
अल्लाह तआला अपनी रहमत से बार बार हरमैन शरीफ़ैन की हाज़िरी, मक़बूल हज, और उमरे नसीब फरमाएगा।
अल्लाह तआला हमें और आप को अपने इन नेक बंदों की नेक सोहबत, इख़्लास और आमाल की तौफ़ीक़ अता फरमाए।
आमीन या अरहमर राहिमीन।