दस स्रोतों से:
• कुरान मजीद की तिलावत गौर व फिक्र के साथ,
• फ़राइज़ के बाद नवाफिल के ज़रिये क़ुर्बत इलाही की कोशिश,
• हर हाल में अल्लाह का ज़िक्र करना,
• अपनी पसंदीदा चीज़ों पर अल्लाह की पसंदीदा चीज़ों को तरजीह देना,
• दिल से अल्लाह के अस्मा व सिफ़ात पर गौर करना,
• अल्लाह की नेमतों व एहसानत का मुशाहिदा और क़ल्ब में इस्तेहज़ार,
• अल्लाह के सामने दिल से आजीज़ी और इन्किसारी इख़्तियार करना,
• तन्हाई में अल्लाह से इस्तिग़फ़ार और तौबा करना,
• अल्लाह के साथ सच्ची मोहब्बत करने वालों की मजलिस में बैठना
(उनकी सोहबत इख़्तियार करना),
• और हर उस सबब से दूरी इख़्तियार करना
जो दिल और अल्लाह अज़्ज़ व जल्ल के दरमियान हाइल हो जाए"

इमाम इब्न क़य्यिम रहमतुल्लाह
[मदारिज अस-सालिकिन]

🌹मंसूर अहमद हाशमी 🌹