इस दुनिया के दस्तूर भी बहुत निराले हैं....!



1. ज़िंदा डूब जाता है, और मुर्दा तैरने लगता है।
2. भूख, गरीबी और अफ्लास के हाथों मरने वालों की याद में देगें पकाई जाती हैं।
3. गर्मी की शिद्दत से मरने वाले नामعلوم शख्स का जनाज़ा, यख़ बस्ता मुर्दा खाने में रखा जाता है।
4. जीते जागते इंसान को कोई रास्ता नहीं देता, और रोड एक्सीडेंट में मरने वाले के लिए एहतरामन् ट्रैफिक रुक जाती है।
5. कई दिनों की तलाश के बाद शादी से पहले जो बहू, बीवी और भाभी "हीर" की तरह लगती है, शादी के कुछ ही अरसे बाद वो "तीर" की तरह लगनी शुरू हो जाती है।
6. गरीब आदमी रोटी खाने के लिए भाग रहा है, और अमीर हज़्म करने के लिए।
7. मस्जिद में दाखिला फ्री है, और सिनेमा में महंगा। लेकिन कितनी अजीब
बात है, मस्जिदें खाली हैं, और सिनेमा भरे पड़े हैं।
8. मोमिन का हर वो दिन ईद होता है जिस दिन वो कोई गुनाह न करे। लेकिन लोग जिस दिन को खास कर "ईद का दिन" कहते हैं, उसी दिन स्पेशल गुनाह करते हैं, फ़िल्में रिलीज़ होती हैं, बे पर्दगी आम होती है, नाच गाने की महफ़िलें सजती हैं... वगैरा वगैरा।
9. दुनिया का ताक़तवर से ताक़तवर पहलवान भी अपने नफ़्स के हाथों शिकस्त खा जाता है।
10. लोग बच्चे के सामने गुनाह करने से तो डरते हैं, लेकिन बच्चे को पैदा करने वाले अल्लाह से नहीं डरते।
11. इंसान डॉक्टर के कहने पर हलाल चीज़ें तो खाना छोड़ देता है, लेकिन अल्लाह के कहने पर हराम कामों से बाज़ नहीं आता।
12. दुनिया वाले मेहनत करने वाले से हसद करते हैं, और सुस्त पड़े रहने वाले को ताने देते हैं।
13. मौत किस लम्हे, किस सांस पर आ जाए, कोई पता नहीं। लेकिन कैसी अजीब बात है, लोग गुनाह करने से फिर भी बाज़ नहीं आते।
14. मुआशरे में बढ़ते हुए जराइम और कराइम के बाद औरतों के हुक़ूक़ और हिफ़ाज़त के लिए तो हज़ारों "हुक़ूक़े निस्वां" तंज़ीमें बनाई गई हैं, लेकिन मर्दों की किरदार साज़ी की तरफ किसी की तवज्जोह नहीं है।
15. दुनिया में सुखी रहना है तो अपने से नीचे वाले को देख, और अगर आख़िरत में सुखी रहना है तो अपने से ऊपर वाले को देखो।
लेकिन इस दुनिया का दस्तूर बहुत निराला है, किसी के पास चार पैसे ज़्यादा हों तो ये उस से ज़्यादा बनाने की कोशिश करते हैं। और एक दिन नमाज़ क्या पढ़ लें अपने आपको दुनिया का सब से बड़ा आबिद व ज़ाहिद मानते हैं।
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