शीर्षक: ज्ञान की लौ और मेरा सफर

लेखन:🖊️ मुहम्मद मसूद रहमानी अररियावी

मेरा ताल्लुक हिंदुस्तान के सूबा बिहार के एक इल्मी और जरखेज इलाके "अररिया" से है। अररिया सिर्फ मेरा घर नहीं, बल्कि मेरी वो पहचान है जिसने मेरे ख्वाबों को बुनियाद फराहम की। एक तालिब-ए-इल्म होने के नाते मैं ये समझता हूं कि इल्म सिर्फ डिग्रियों का नाम नहीं, बल्कि अपने रब को पहचानने और उसकी मखलूक की खिदमत करने का नाम है।
मेरा सफर एक ऐसे मुसाफिर का सफर है जो इल्म की प्यास बुझाने निकला है। मेरा कलम अररिया की उसी मिट्टी की खुशबू को फैलाना चाहता है जहां से बड़े-बड़े उलमा और दानिश्वरों ने जन्म लिया। मैं अपनी तहरीरों के जरिए अपने इलाके और अपनी कौम के नौजवानों में ये शऊर बेदार करना चाहता हूं कि तालीम ही वो वाहिद रास्ता है जो हमें पस्ती से निकालकर बुलन्दियों तक ले जा सकता है।
एक तालिब-ए-इल्म की हैसियत से मेरी कोशिश है कि मैं जो कुछ सीखूं, उसे सच्चाई और दियानतदारी के साथ दूसरों तक पहुंचाऊं। क्योंकि रोशनी वही है जो दूसरों के अंधेरे दूर कर दे।

सितारों से आगे जहां और भी हैं
अभी इश्क के इम्तेहां और भी हैं
तू शाहीन है, परवाज है काम तेरा
तेरे सामने आसमां और भी हैं

"मैं मुहम्मद मसूद रहमानी, एक तालिब-ए-इल्म की हैसियत से आपकी दुआओं और सपोर्ट का तालिब हूं। अगर आपको मेरी ये तहरीर और मेरा जज्बा पसंद आया हो, तो मुझे फॉलो करें और इस तालीमी व फिक्री मिशन में मेरा साथ दें। आपका एक 'फॉलो' मेरी हिम्मत को दोचंद कर सकता है। जजाक अल्लाह खैरा!"