मानव इतिहास में अगर किसी दो शक्तियों ने दुनिया की शक्ल बदल दी है तो वो साइंस और टेक्नोलॉजी हैं। साइंस ने हमें सोचने का सलीका दिया और टेक्नोलॉजी ने इस सोच को अमल में ढाल कर हमारी जिंदगियों को आसान, तेज़ और खूबसूरत बना दिया। आज का दौर महज जानकारी का नहीं बल्कि निर्माण और इज़हार का दौर है, जहां इल्म के साथ हुस्न और फन भी बराबर अहमियत रखते हैं।
साइंस की बुनियाद मुशाहिदा, तजुर्बा और तहकीक पर है, जबकि टेक्नोलॉजी इन्हीं उसूलों को अमली शक्ल देती है। कंप्यूटर, मोबाइल फोन, इंटरनेट और जदीद सॉफ्टवेयर इसी तरक्की याफ्ता सोच का नतीजा हैं। इन्हीं ईजादात ने फुनून-ए-लतीफा को भी एक नई जिहत अता की है, जिसकी बेहतरीन मिसाल ग्राफिक डिजाइनिंग है।
ग्राफिक डिजाइनिंग दरअसल साइंस, टेक्नोलॉजी और फन का हसीन मिलाप है। रंगों की नफसियात, तनासुब (Proportion), तरतीब (Layout) और बसरी तवाज़ुन जैसे उसूल साइंसी बुनियाद रखते हैं, जबकि इनका इस्तेमाल तखलीकी ज़ौक और फन्नी महारत का तकाज़ा करता है। आज एक पोस्टर, लोगो, किताब का सरवरक या सोशल मीडिया डिजाइन सिर्फ खूबसूरती नहीं बल्कि एक मुकम्मल पैगाम होता है, जो जदीद टेक्नोलॉजी के जरिए दुनिया तक पहुंचता है।
इसी तरह खत्ताती (Calligraphy) एक कदीम मगर जिंदा फन है, जिसे टेक्नोलॉजी ने नई रूह बख्शी है। कभी कलम और दवात तक महदूद रहने वाली खत्ताती आज डिजिटल टैबलेट, कंप्यूटर और मखसूस सॉफ्टवेयर के जरिए आलमी सतह पर मुतारिफ हो रही है। अरबी, उर्दू और फारसी खत्ताती के हसीन नमूने अब डिजिटल डिजाइन में शामिल हो कर न सिर्फ तहरीर बल्कि एक बसरी तजुर्बा बन चुके हैं।
साइंस और टेक्नोलॉजी ने फनकार को वो ताकत दी है कि वो अपने ख्यालात को महदूद वसाइल के बगैर पेश कर सके। आज एक तालिब इल्म या तखलीक कार अपने कमरे में बैठ कर कंप्यूटर के जरिए ऐसा काम कर सकता है जो कभी बड़े इदारों तक महदूद था। ये तरक्की दरअसल इल्म, फन और टेक्नोलॉजी के बाहमी तावून का नतीजा है।
आखिर में ये कहना बेजा न होगा कि साइंस और टेक्नोलॉजी महज सहूलत का नाम नहीं बल्कि हुस्न-ए-इज़हार और तखलीकी इंकलाब का जरिया हैं। जब ग्राफिक डिजाइनिंग की जदीद तकनीकें और खत्ताती का रिवायती जमाल यकजा हो जाते हैं तो एक ऐसा फन जन्म लेता है जो आंखों को भी भाता है और दिलों पर भी असर छोड़ता है। यही जदीद दौर की असल पहचान है।
साइंस की बुनियाद मुशाहिदा, तजुर्बा और तहकीक पर है, जबकि टेक्नोलॉजी इन्हीं उसूलों को अमली शक्ल देती है। कंप्यूटर, मोबाइल फोन, इंटरनेट और जदीद सॉफ्टवेयर इसी तरक्की याफ्ता सोच का नतीजा हैं। इन्हीं ईजादात ने फुनून-ए-लतीफा को भी एक नई जिहत अता की है, जिसकी बेहतरीन मिसाल ग्राफिक डिजाइनिंग है।
ग्राफिक डिजाइनिंग दरअसल साइंस, टेक्नोलॉजी और फन का हसीन मिलाप है। रंगों की नफसियात, तनासुब (Proportion), तरतीब (Layout) और बसरी तवाज़ुन जैसे उसूल साइंसी बुनियाद रखते हैं, जबकि इनका इस्तेमाल तखलीकी ज़ौक और फन्नी महारत का तकाज़ा करता है। आज एक पोस्टर, लोगो, किताब का सरवरक या सोशल मीडिया डिजाइन सिर्फ खूबसूरती नहीं बल्कि एक मुकम्मल पैगाम होता है, जो जदीद टेक्नोलॉजी के जरिए दुनिया तक पहुंचता है।
इसी तरह खत्ताती (Calligraphy) एक कदीम मगर जिंदा फन है, जिसे टेक्नोलॉजी ने नई रूह बख्शी है। कभी कलम और दवात तक महदूद रहने वाली खत्ताती आज डिजिटल टैबलेट, कंप्यूटर और मखसूस सॉफ्टवेयर के जरिए आलमी सतह पर मुतारिफ हो रही है। अरबी, उर्दू और फारसी खत्ताती के हसीन नमूने अब डिजिटल डिजाइन में शामिल हो कर न सिर्फ तहरीर बल्कि एक बसरी तजुर्बा बन चुके हैं।
साइंस और टेक्नोलॉजी ने फनकार को वो ताकत दी है कि वो अपने ख्यालात को महदूद वसाइल के बगैर पेश कर सके। आज एक तालिब इल्म या तखलीक कार अपने कमरे में बैठ कर कंप्यूटर के जरिए ऐसा काम कर सकता है जो कभी बड़े इदारों तक महदूद था। ये तरक्की दरअसल इल्म, फन और टेक्नोलॉजी के बाहमी तावून का नतीजा है।
आखिर में ये कहना बेजा न होगा कि साइंस और टेक्नोलॉजी महज सहूलत का नाम नहीं बल्कि हुस्न-ए-इज़हार और तखलीकी इंकलाब का जरिया हैं। जब ग्राफिक डिजाइनिंग की जदीद तकनीकें और खत्ताती का रिवायती जमाल यकजा हो जाते हैं तो एक ऐसा फन जन्म लेता है जो आंखों को भी भाता है और दिलों पर भी असर छोड़ता है। यही जदीद दौर की असल पहचान है।