लेख: शफ़ीक़ुर रहमान बिलाल
🌿 कुरानी संदेश: ’’अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन‘‘
कुरान-ए-हकीम की पहली ही आयत ’’अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन‘‘ में वो जामे संदेश है जो इंसान के अक़ीदे, सोच और किरदार को एक मज़बूत बुनियाद फ़राहम करता है।
हमद: कमाल सिफ़ात वाले रब की तारीफ़
’’अल-हम्दु लिल्लाह‘‘ का मतलब ये है कि हर मुकम्मल तारीफ़ सिर्फ़ अल्लाह ही के लिए है—
क्योंकि:
उसके अफ़आल फ़ज़ल और अदल के दरमियान हैं,
उसकी नेमतें बेशुमार हैं,
और वो हर लिहाज़ से कमाल का मालिक है।
ये आयत हमें सिखाती है कि हक़ीक़ी तारीफ़ सिर्फ़ उस हस्ती के लिए है जो कभी ज़ुल्म नहीं करती, और हमेशा ख़ैर का फ़ैसला करती है।
रब्बिल आलमीन: हर लम्हे की हिफ़ाज़त
’’रब्ब‘‘ वो है जो पैदा करे, पाले, संभाले और ज़रूरतें पूरी करे।
और ’’आलमीन‘‘ में हर मख़लूक़ शामिल है।
इसका मतलब ये है कि:
जो भी नेमत हमें मिली है, वो अल्लाह ही की तरफ़ सेहै।
ज़िंदगी का हर साँस, रिज़्क़ की हर सूरत, दिल का हर इत्मीनान—
सब ’’रब्बिल आलमीन‘‘ की अताएँ हैं।
:रुबूबियत की दो क़िस्में
रुबूबियत आम्मा
जो हर इंसान, हर मख़लूक़ को शामिल है:
पैदाइश, रिज़्क़, हिफ़ाज़त, और दुनियावी ज़रूरतों की तकमील।
रुबूबियत ख़स्सा
जो सिर्फ़ ईमान वालों के लिए है:
दिल में ईमान डालना, नेकी की तौफ़ीक़ देना, गुनाहों से बचाना, और रूहानी तरक़्क़ी अता करना।
इसीलिए अंबिया की दुआएँ अक्सर लफ़्ज़ ’’रब्ब‘‘ से शुरू होती हैं—क्योंकि उनकी हाजात रुबूबियत-ए-ख़स्सा के तहत आती हैं।
:आयत का बुनियादी पैग़ाम
इस एक जुमले में कायनात की पूरी हक़ीक़त पोशीदा है:
अल्लाह कामिल सिफ़ात का मालिक है—इसीलिए हम्द का मुस्तहिक़ है।
दुनिया का हर निज़ाम उस की रुबूबियत के तहत चल रहा है।
इंसान हर लम्हा अल्लाह का मोहताज है।
असल कामयाबी अल्लाह की ख़ास तरबियत (रुबूबियत ख़स्सा) में है
इख़्तिताम
इंसान अगर इस हक़ीक़त को दिल से समझ ले कि:
नेमत अल्लाह की है, मदद अल्लाह की है, और परवरिश भी अल्लाह की है—
तो उसके दिल से ख़ौफ़, बेचैनी और मायूसी दूर हो जाती है,
और ज़िंदगी में शुक्र, सब्र और सुकून पैदा होता है।
, कुरान करीम का पहला दरस ही यही है:
**अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन —
ज़िंदगी का असल सहारा, असल हक़ीक़त, असल यक़ीन।**