अल्लाह की तरफ लौट आओ…

अल्हम्दुलिल्लाह रब्बिल आलमीन, वस-सलातु वस-सलाम अला रसूलुल्लाह ﷺ।

मेरी प्यारी बहनों!

आज बस अपने दिल से एक सवाल करें: क्या हम वाकई अल्लाह के करीब हैं?

हम दुनिया के कामों के लिए वक्त निकाल लेते हैं, लोगों से बात करने के लिए घंटों बैठ जाते हैं, मगर अपने रब के लिए चंद लम्हे निकालने में सुस्ती करते हैं। हालांकि वही अल्लाह हमारी हर परेशानी जानता है, हमारी खामोश दुआएं सुनता है और हमारे दिल के छुपे हुए दर्द से भी वाकिफ है।

हम गुनाह करते हैं, फिर सोचते हैं कि अब हम अल्लाह के काबिल नहीं रहे। लेकिन यह शैतान का धोखा है। अल्लाह तआला फरमाते हैं:

ला तक़नतू मिन रहमतिल्लाह
अल्लाह की रहमत से नाउम्मीद न हो।

इसलिए अगर नमाज़ में कमी हो गई है तो आज से संभल जाएं, कुरान छूट गया है तो दोबारा उठा लें, गुनाह हो गया है तो सच्ची तौबा कर लें, किसी का दिल दुखाया है तो माफी मांग लें।

हमें नहीं मालूम हमारी जिंदगी का आखिरी दिन कौन सा है।

इसलिए कल का इंतज़ार न करें।
अल्लाह की तरफ वापसी का बेहतरीन वक्त आज है।

अपने रब के सामने सजदे में जाएं और बस इतना कहें:

या अल्लाह! मैं कमज़ोर हूँ, मुझे मज़बूत कर दे।
मैं गुनाहगार हूँ, मुझे माफ फरमा दे।
मैं भटक गई हूँ, मुझे अपनी तरफ वापस बुला ले।
और जब मैं तुझसे मिलूँ तो तू मुझसे राज़ी हो।

याद रखें, दुनिया की हर चीज़ खत्म हो जाएगी, मगर अल्लाह की रहमत बाकी रहेगी।

लिहाज़ा दुनिया में रहें, मगर दिल अल्लाह के साथ रखें।
लोगों से मोहब्बत करें, मगर अल्लाह की मोहब्बत को सबसे ऊपर रखें।
और हर हाल में अपने रब से जुड़े रहें।

अल्लाह तआला हमें अपनी मोहब्बत, अपनी इताअत और अपनी रज़ा वाली ज़िंदगी अता फरमाए। आमीन।