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आज का सफर

अकाबरिन व बुजुर्गों की बस्ती रायेपुर जिला सहारनपुर



रायेपुर जहां एक जमाना तक फकीह उन् नफ्स हज़रत मौलाना रशीद अहमद गंगोही रहमतुल्लाह अलैह के चहेते खलीफा हज़रत शाह अब्दुल रहीम रहमतुल्लाह अलैह ने खानकाह कायम की और वहां बैठकर पूरे आलम में रूहानी फैज़ पहुंचाया

फिर हज़रत के खलीफा हज़रत शाह अब्दुल कादिर रायेपुरी रहमतुल्लाह ने इस निस्बत में चार चांद लगाए

एक जमाना में रायेपुर की खानकाह ऐसी जगह थी जहां बैक वक्त मुल्क बड़े उलमा अपनी बातिनी इस्लाह के लिए हाजिर होते थे

बानि ए तहरीक तबलीग मौलाना इलियास साहब रहमतुल्लाह अलैह फरमाते थे जब मेवात के इज्तिमात का सिलसिला खत्म होता तो अपने दिल को नूरानी करने के लिए रायेपुर हाजिर होता


इसी तरह हज़रत शेख उल हदीस मौलाना ज़करिया कांधलवी रहमतुल्लाह ताला की रायेपुर मुसलसल हाजिरी होती

इसी तरह मुफक्किर ए इस्लाम हज़रत मौलाना अबुल हसन अली मियां नदवी रहमतुल्लाह अलैह

इसी तरह हज़रत मौलाना मंज़ूर नोमानी रहमतुल्लाह अलैह


गर्ज ये कि रायेपुर की बस्ती अहल अल्लाह की बस्ती है


हालात अगरचे अगरचे बदल चुके हैं लेकिन रूहानियत और निस्बत अभी बाकी है।