टिप्पणी: किताब - बयानात-ए-सीरत-ए-नबविया
मुसन्निफ़: हज़रत मौलाना डॉक्टर मुहम्मद असजद क़ासमी नदवी साहिब
शैख़ अल-हदीस व मुहतमिम, मदरसा अरबिया इमदादिया मुरादाबाद
टिप्पणीकार ✍🏻 मुहम्मद आदिल अररियावी
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मुहतरम क़ारीईन, उस्ताद मुहतरम हज़रत मौलाना डॉक्टर मुहम्मद असजद क़ासमी नदवी साहिब की अज़ीम तसनीफ़ बयानात-ए-सीरत-ए-नबविया, सीरत-ए-नबवी ؐ के मौज़ू पर निहायत उम्दा, मुस्तनद और दिलनशीं इज़ाफ़ा है। 438 सफ़हात पर मुश्तमिल यह मुबारक किताब हुज़ूर सैय्यद-ए-आलम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मक्की व मदनी हयात-ए-तैयबा को जिस हुस्न-ए-तरतीब, सलासत-ए-बयान और कुव्वत-ए-इस्तिदलाल के साथ पेश करती है, वह मुसन्निफ़ की इल्मी गहराई, तहक़ीक़ी बसीरत और इश्क़-ए-रसूल ﷺ का रोशन सुबूत है।
मुसन्निफ़ ने न सिर्फ वाक़िआत-ए-सीरत को महज़ बयान करने पर इक्तिफ़ा नहीं किया बल्कि उनके बातिनी असरार, हिकमतों और अमली दुरूस को निहायत हकीमाना अंदाज़ में उजागर किया है। हर मक़ाम पर मुस्तनद दलाइल, ठोस हवालाजात और मुतवाज़िन तजज़िया किताब को आम क़ारीईन के साथ-साथ अहल-ए-इल्म के लिए भी यकसाँ तौर पर मुफ़ीद बना देता है। उसलूब-ए-बयान रवाँ, दिल में उतर जाने वाला और ईमान को ताज़गी बख़्शने वाला है। खुसूसन हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अख़लाक़ी, दावती, इस्लाही और इंकलाबी ज़िंदगी का बयान पढ़ कर दिल की दुनिया बदल जाती है।
इस किताब का एक बड़ा इम्तियाज़ यह भी है कि इसमें सीरत-ए-नबवी ؐ को महज़ तारीख़ी वाक़िआत के तौर पर नहीं पेश किया गया बल्कि अस्र-ए-हाज़िर के चैलेंजेज़ और उम्मत-ए-मुस्लिमा की ज़रूरियात को सामने रखते हुए इससे अमली राह नुमाई फ़राहम की गई है। यही वह खुसूसियत है जो इस किताब को दीगर आम तसानीफ़ से मुमताज़ करती है।
ख़ाकसार ने जब इस किताब का मुताला किया तो दिल बे-इख़्तियार मुहब्बत-ए-रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से लबरेज़ हो गया और हर सफ़हा पढ़ कर अपनी रूह में एक नई ताज़गी, सुकून और मारफ़त का इज़ाफ़ा महसूस किया। बिला शुबा यह किताब सीरत के ज़ख़ीरे में एक क़ीमती और लासानी तोहफ़ा है।
दुआ है कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हज़रत मुसन्निफ़ की इस मेहनत-ए-शाक़्क़ा को क़बूल फ़रमा कर इसे आम नफ़ा आम करे, इसे उम्मत के दिलों में ज़िंदा व जाविद असरात बख़्शे और हज़रत की इल्मी व रूहानी खिदमात को अपनी बारगाह में शरफ़-ए-क़बूलियत अता फ़रमाए।
आमीन सुम्मा आमीन या रब्बुल आलमीन।