😂चार पत्नियों के फायदे 

सबसे पहला “फायदा”
 यह बताया जाता है कि चार
 पत्नियां हों तो घर में कभी ख़ामोशी नहीं होती।
 हर वक़्त एक न एक बेगम किसी न किसी मसले पर बात करती रहती है।
अगर एक नाराज़ हो तो दूसरी समझाने आ जाती है, तीसरी दलील देती है, और चौथी फैसला सुनाती है।
 यूँ एक शौहर के घर में पूरा “अदालती निज़ाम” क़ायम हो जाता है,
जहां वो खुद हमेशा मुलज़िम होता है।😃

दूसरा बड़ा फायदा
 यह है कि आदमी कभी अकेला नहीं रहता।
आज कल लोग कहते हैं कि loneliness बड़ा मसला है,
मगर चार पत्नियों वाला आदमी इस लफ़्ज़ का मतलब ही भूल जाता है।
 वो अगर छुप कर दो मिनट सुकून से बैठना भी चाहे तो कोई न कोई आवाज़ आ जाती है:
“सुनिए जी…!”
 और वो बेचारा फ़ौरन हाज़िर हो जाता है,
जैसे कोई सिपाही अपने अफ़सर के हुक्म पर।😆

तीसरा फायदा
 यह बताया जाता है कि आदमी “मुंसिफ़” बन जाता है। चारों बीवियों के दरमियान बराबरी करना कोई आसान काम नहीं।
एक को अगर एक चूड़ी ज़्यादा दे दी तो दूसरी फ़ौरन नोटिस ले लेती है।
 यूँ शौहर साहब में इंसाफ़, बर्दाश्त और हिसाब किताब की ऐसी महारत पैदा हो जाती है कि वो चाहे तो किसी मुल्क का वज़ीर-ए-ख़ज़ाना भी बन
सकता है😁
चौथा फायदा
 सेहत से मुताल्लिक़ है।
चार बीवियों के दरमियान घूमते फिरते शौहर की ऐसी दौड़ लगती है
कि उसे अलग से वर्ज़िश की ज़रूरत ही नहीं रहती।
 कभी इस कमरे से इस कमरे,
कभी इस बाज़ार से इस बाज़ार—
यूँ उसकी fitness खुदबखुद बरकरार रहती है, बल्कि बाज़ औक़ात तो हद से ज़्यादा ही बरकरार रहती है!😂

आयशा 🍁