*असल महानता विनम्रता में है, पदों में नहीं*
*खमा बकफ मोहम्मद आदिल अररियावी*
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अच्छी जिंदगी गुजारने का एक अहम उसूल यह है कि इंसान चाहे कितनी ही बुलंदियों तक क्यों न पहुंच जाए उसे अपने रवैये में आजिजी और इनकिसारी को हमेशा बरकरार रखना चाहिए। बड़े ओहदे, ज्यादा दौलत या माशरती मुकाम हासिल कर लेने के बाद अक्सर लोगों के अंदाज में एक तरह का गुरूर या फासला आ जाता है जो न सिर्फ दूसरों को तकलीफ देता है बल्कि इंसान के अपने सुकून को भी मुतास्सिर करता है। इसलिए जरूरी है कि कामयाबी के बावजूद इंसान अपने अंदर सादगी और आमपन को जिंदा रखे।
जब आप खुद को आम इंसान समझते हैं और दूसरों के साथ बराबरी का सुलूक करते हैं तो आपके इर्द-गिर्द के लोग आपके करीब रहना पसंद करते हैं। वह आपसे बात करते हुए झिझक महसूस नहीं करते और न ही अपने आप को कमतर समझते हैं। यही वह असल मुकाम है जो एक अच्छे इंसान को दूसरों के दिलों में इज्जत दिलाता है न कि उसका ओहदा या दौलत।
सादगी इख्तियार करने का मतलब यह नहीं कि आप अपनी कामयाबियों को नजरअंदाज करें बल्कि इसका मतलब यह है कि आप अपनी कामयाबियों को दूसरों पर बर्तरी जताने के लिए इस्तेमाल न करें। एक पुरसुकून और मुतवाजन जिंदगी वही शख्स गुजार सकता है जो अपने अंदर तकब्बुर को जगह न दे और हर इंसान को इज्जत की नजर से देखे।
हमेशा याद रखें कि असल स्टेटस वह नहीं जो दुनिया आपको देती है बल्कि वह है जो आपके रवैये से जाहिर होता है। अगर कोई शख्स आपके सामने बैठ कर खुद को कमतर महसूस न करे बल्कि इज्जत और इतमिनान के साथ बात कर सके तो यही आपकी हकीकी कामयाबी है।