एक औरत जब माँ बनती है…
तो सिर्फ़ उसकी ज़िंदगी नहीं बदलती, उसकी पूरी कायनात बदल जाती है।
वह अपने अंदर एक नई दुनिया बसाती है, एक ऐसा जहां जहां हर खुशी, हर उम्मीद, हर ख़्वाब किसी और के नाम हो जाता है।
उसकी हर धड़कन अब सिर्फ़ उसकी अपनी नहीं रहती…
बल्कि एक नन्ही सी जान के लिए बजने लगती है, जो अभी दुनिया में आई भी नहीं होती
मगर
उसके दिल में पूरी तरह ज़िंदा होती है।
वह अपने वजूद के अंदर मोहब्बत की एक ऐसी कहानी लिखती है, जिसका हर लफ़्ज़ क़ुरबानी से जुड़ा होता है।
उसके जिस्म में तब्दीलियाँ आती हैं, दर्द बढ़ता है, नींद कम हो जाती है, थकन उसके क़दमों से लिपट जाती है…
मगर उसके लबों की मुस्कराहट कम नहीं होती, क्योंकि वह जानती है
कि यह मुझसे जुड़े हर रिश्ते के लिए खुशी का बाइस है
माँ बनना सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं
एक ऐसी कैफ़ियत है जिसमें औरत खुद को भूल कर किसी और के लिए जीना सीख लेती है।
वह अपनी ख्वाहिशें पीछे छोड़ देती है, अपनी राहत क़ुरबान कर देती है,
सिर्फ़ इसलिए कि उसकी गोद में आने वाली ज़िंदगी सुकून से सांस ले सके।
वह दर्द सहती है मगर शिकवा नहीं करती,
वह जागती है मगर थकन का ज़िक्र नहीं करती,
वह टूटती है मगर ज़ाहिर नहीं होने देती…
क्योंकि उसके अंदर ममता जाग चुकी होती है,
माँ सिर्फ़ देती है… बदले में कुछ नहीं मांगती।
माँ वह हस्ती है जो अपने वजूद को बांट देती है,
अपने ख़्वाब किसी और की आँखों में सजा देती है,
अपनी दुनिया किसी और के नाम कर देती है… और फिर भी खुश रहती है।
सलाम है हर उस माँ को…
जो खामोशी से हर दुख सह कर भी मज़बूत रहती है,
जो अपने आंसू छुपा कर दूसरों को मुस्कुराना सिखाती है,
और जो इस दुनिया में मोहब्बत की सबसे खूबसूरत मिसाल बन कर ज़िंदा रहती है।
सलाम है दुनिया की हर माँ को
क्या फ़र्क़ पड़ता है मेरी है या आप की है
माँ तो माँ है ना
इसलिए हर माँ की क़द्र करें
अपनी माँ की तरह
आयशा ❤