हम लोगों के पीछे भागते हैं, उनकी मोहब्बत और तवज्जो के भूखे रहते हैं, उनसे इज़हार-ए-मोहब्बत करते हैं, उनसे कहते हैं कि हम आपसे बहुत मोहब्बत करते हैं, आपको बहुत याद करते हैं।
क्या कभी अल्लाह से मोहब्बत का इज़हार किया है? कभी अल्लाह ताला से बोला कि अल्लाह मुझे आपसे बहुत मोहब्बत है, कभी अल्लाह ताला से बोला कि आज मैंने आपको बहुत याद किया, कभी अल्लाह को अल्लाह से माँगा है?🤍
हम लोगों के पीछे तो बहुत भागते हैं, हम अपने आप में इतना गुम हो जाते हैं कि हमें अल्लाह भूल जाता है।💔
हम अक्सर अल्लाह को भूल जाते हैं। जब हम दोस्त के पास फ़ोन करते हैं तो उससे घंटों बातें करते हैं और अल्लाह से बातें करना भूल जाते हैं, नमाज़ छोड़ देते हैं, भूल जाते हैं कि वो हमें देख रहा है और गुनाह कर बैठते हैं।
हम भूल जाते हैं उसकी रहमत की चादर को। मगर वो नहीं भूलता।
हम अपनी ख्वाहिशात की पैरवी कर रहे हैं, हमने शैतान को अपना दोस्त बना लिया।
जबकि अल्लाह ने कुरान मजीद में इरशाद फरमाया:- اِنَّہٗ لَکُمْ عَدُوٌّ مُّبِیْنٌ۔
बेशक शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है।