आज का दौर — डेटा, सोशल मीडिया और हमारी ज़िम्मेदारी
✍️ मोहम्मद अली सुब्हानी
आज का दौर हक़ीक़त में डेटा और मालूमात का दौर है। जिस के पास जितनी ज़्यादा मालूमात होती हैं, वो उतना ही ताक़तवर और कामयाब समझा जाता है। बड़ी बड़ी कम्पनियाँ भी इसी बात पर तवज्जोह देती हैं कि उन के पास ज़्यादा से ज़्यादा मुस्तएमीन का डेटा हो, ताकि वो अपनी मसनूआत और ख़िदमात को बेहतर तरीक़े से फ़रोख़्त कर सकें।
इसी वजह से सोशल मीडिया की अहमियत बहुत बढ़ गई है। आज कल जिस शख्स के जितने ज़्यादा फॉलोवर्स होते हैं, उसे उतना ही मक़बूल और कामयाब समझा जाता है। ज़्यादा फॉलोवर्स रखने वाले लोगों को इश्तिहारात, प्रोमोशन्स और अफ़िलिएट मार्केटिंग के ज़रिए ज़्यादा कमाई के मौक़े मिलते हैं। लेकिन सिर्फ फॉलोवर्स का ज़्यादा होना ही कामयाबी नहीं है, बल्कि उन का सही इस्तेमाल करना भी ज़रूरी है। यही काम आज कल डेटा एनालिटिक्स के माहिरिन करते हैं, जो लोगों की पसंद और नापसंद को समझ कर मख़सूस हदफ़ी सामईन (Target Audience) तक पैग़ाम पहुँचाते हैं।
अफ़सोस की बात ये है कि बहुत से लोग फॉलोवर्स और लाइक्स के पीछे इस क़दर भाग रहे हैं जैसे यही ज़िंदगी का सब से बड़ा मक़सद हो। ख़ास तौर पर नौजवान लड़के और लड़कियाँ सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियोज़ अपलोड करके हर थोड़ी देर बाद लाइक्स चेक करते हैं और इसी में ख़ुशी महसूस करते हैं। ये आदत आहिस्ता आहिस्ता एक ज़ेहनी दबाओ और बीमारी की शक्ल इख़्तियार कर सकती है, जिस से खुद एतमादी और ज़ेहनी सुकून मुतास्सिर होता है।
इस के अलावा, कुछ लोग फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए ग़ैर ज़रूरी या नामुनासिब मवाद भी शेयर करते हैं, जो न सिर्फ उन की शख्सियत बल्कि मुआशरे पर भी मंफ़ी असर डालता है। हमें ये समझना चाहिए कि सोशल मीडिया एक ताक़तवर ज़रीया है, जिसे मुस्बत मक़ासिद के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
जब किसी कंपनी, मज़हबी या दुनियावी शख्सियत के फॉलोवर्स ज़्यादा हो जाते हैं और वो एक ख़ास मुक़ाम हासिल कर लेते हैं, तो उन पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी भी आइद होती है। उन्हें चाहिए कि वो अपने फॉलोवर्स की इज्ज़त करें, उन्हें सही मालूमात फ़राहम करें और उन की रहनुमाई करें, न कि उन्हें सिर्फ अपने फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करें।
आखिर में, हमें ये याद रखना चाहिए कि असल कामयाबी सिर्फ फॉलोवर्स या लाइक्स में नहीं, बल्कि अच्छे किरदार, इल्म और मुस्बत असर में है। अगर हम सोशल मीडिया को समझदारी और ज़िम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करें, तो ये हमारे लिए फ़ाइदामंद साबित हो सकता है, वरना ये हमें नुक़सान भी पहुँचा सकता है।