इस हदीस-ए-मुबारका में निजात का निहायत सादा मगर गहरा उसूल बताया गया है कि इंसान तीन बड़ी खराबियों से बच जाए तो जन्नत का मुस्तहिक बन सकता है:


 *1. तकब्बुर* ।۔۔۔۔ आज कल विभिन्न चीज़ों पर तकब्बुर आम हो चुका है। हालाँकि तकब्बुर इंसान को हक़ कुबूल करने और दूसरों की इज्ज़त करने से रोकता है। कामयाब वो है जो आजिज़ी इख्तियार करे।


 *2. खियानत* ۔۔۔ हर किस्म की बददियानती को शामिल है जैसे सरकारी वसाइल का गलत इस्तेमाल, कारोबार में धोखा, अमानत में खियानत। 


 *3. क़र्ज़* ।۔۔۔۔ बिला ज़रूरत क़र्ज़ लेना और फिर अदा न करना एक संगीन मसला है। आज कल लोग आसानी से क़र्ज़ ले लेते हैं मगर वापसी में सुस्ती करते हैं, हालाँकि इस्लाम में क़र्ज़ की अदायगी बहुत अहम है।