अल्लाह ताला जो इंसान का और कुल कायनात का खालिक रब
,परवरदिगार और पालनहार है उस अल्लाह ने इंसान पर करोड़ों नेमतें अता फरमाई हैं जिनका इस मादी दौर में भी शुमार नामुमकिन है लेकिन इन तमाम नेमतों में सबसे आला बेहतर वो ईमान की नेमत है ।
यह वो नेमत है जो सबसे कीमती है और दुनिया की तमाम नेमतें मिलकर इस दौलत-ए-ईमान का मुकाबला नहीं
कर सकती।
यही वजह है कि अकायद की दुरुस्ती मुसलमान का अव्वलीन फरीजा करार पाया ।और दारेन की खुशबख्ती और बदबख्ती यह अकायद के दुरुस्त और खराब होने पर मुनहसर है
अकायद यह बुनियाद है और आमाल यह इमारत है
अगर बुनियाद मजबूत और पायदार होगी तो इमारत बाकी रहेगी
वरना बेबुनियाद इमारत के जाय होने में कुछ वक्त नहीं लगता ।
लिहाजा इस्लामी अकायद पर कामिल यकीन बंदा-ए-मोमिन की इनफिरादी जिंदगी की अहम तरीन जरूरत है
हर मुसलमान का फर्ज है कि वह अपने पैदा करने वाले को बिला शिरकत-ए-गैर ,बगैर किसी शक व शुबह के माने और कुफ्र व शिर्क की हर छोटी बड़ी हर किस्म की गंदगी से अपने दिल व दिमाग को आईना की तरह साफ व शफ्फाफ रखे ।
ईमान की अहमियत को एक मिसाल से समझें
मिसाल के तौर पर।एक ऐसा बंदा जिसे दुनिया की तमाम नेमत और सहूलत हासिल हो ,तन-ए-तनहा पूरी दुनिया की बादशाहत उसे मिल जाए ऐश व आराम की तमाम चीजें उसे मयस्सर हो ,मन पसंद जिंदगी गुजार रहा हो ,ना कभी बीमार पड़ता हो ,ना कोई मुसीबत उसे कभी पहुंची हो ,कोई दुख उसने ना देखा हो खाने पीने पहनने की हर चीज आला दर्जा की वह इस्तेमाल करता हो मगर ईमान ना हो तो दरहकीकत यह बंदा नाकाम और बदनसीब है ,क्योंकि ज्यों ही उसकी सांस थमेगी मौत वाके होगी वह मरते ही सीधे हमेशा हमेशा की आग और सजाओं में जाएगा जिसका उसने कभी तसव्वुर ना किया होगा और उसे यह याद भी ना रहेगी कि उसने दुनिया में कोई ऐश व आराम की जिंदगी गुजारी है
इसके बरखिलाफ अगर एक बंदा ऐसा हो जिसकी तमाम उम्र मुसीबतों में गुजरे ना उसे रहने का घर नसीब हो ना पहनने को कपड़े, लुकमा लुकमा को तरसता हो लेकिन उसके दिल में ईमान हो और वह ईमान के साथ रब के हुजूर हाजिर हो तो वह ऐसा खुशकिस्मत है कि मरते ही रब ताला उसे जन्नत देंगे जहां वह अपने मन पसंद की जिंदगी गुजारेगा हर ऐश व आशाइश की चीजें मुहैया होंगी और
वह इस नेमत से कभी महरूम भी ना होगा।