इंसान की ज़िंदगी कुछ दिनों का सफर है, और असल कामयाबी इसी में है कि यह वक़्त अल्लाह की इताअत में गुज़ारा जाए। दुनिया की चमक दमक वक़्ती है, मगर आखिरत हमेशा रहने वाली है, इसलिए समझदार वही है जो अपने आमाल को संवारता है।
हमें चाहिए कि अपनी नमाज़ों की पाबंदी करें, सच बोलें, दूसरों के साथ हुस्न-ए-सुलूक करें, और दिलों में किसी के लिए कीना न रखें। गुनाहों से बचना और तौबा करते रहना मोमिन की पहचान है।
याद रखें, अल्लाह तआला हर अमल को देख रहा है, छोटा हो या बड़ा। इसलिए हर काम इख्लास के साथ करें और अपनी नीयत को दुरुस्त रखें।
अल्लाह तआला हमें सीधी राह पर चलने और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन 🤲