रमजानुल मुबारक के बाद शव्वाल के छह रोज़े रखना बड़ी फ़ज़ीलत का बाइस है। नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया कि जिस ने रमज़ान के रोज़े रखे, फिर उस के बाद शव्वाल के छह रोज़े रखे तो उसे पूरे साल के रोज़ों का सवाब मिलता है।
फ़ज़ीलत:
पूरे साल के रोज़ों के बराबर अज्र
नेकियों में इज़ाफ़ा और दरजात की बुलंदी
रमज़ान की कमी को पूरा करने का ज़रिया
मसनून तरीक़ा:
शव्वाल के महीने में किसी भी वक़्त छह रोज़े रखे जा सकते हैं
मुसलसल रखना बेहतर है, लेकिन अलग अलग रखना भी जायज़ है
पहले क़ज़ा रोज़े हों तो उन्हें पूरा करना ज़्यादा बेहतर है
अल्लाह तआला हमें इन मुबारक रोज़ों की क़द्र करने और अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन 🤲