हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया: जो व्यक्ति दिन के पहले हिस्से में सूरह यासीन पढ़ लेता है उसकी पूरे दिन की ज़रूरतें पूरी कर दी जाती हैं।
(सुनन अल-दारमी, अल-मुअजम अल-अवसत़ अल-तबरानी)
*तरीक़ा-ए-दुआ बाद अज़ तिलावत सूरह यासीन*
जब तिलावत कर ले तो दरूद शरीफ़ पढ़ कर इसका सवाब हज़रत ﷺ की रूह मुबारक को ईसाल कर दे फिर यूं दुआ करे कि ऐ अल्लाह! हमने आपके कुरान पाक के क़ल्ब की तिलावत की है, इसकी बरकत से हमारे दिल को अल्लाह वाला बना दीजिए और हमारा नाम आलम-ए-ग़ैब में शरीफ़ों के साथ दर्ज फ़रमा दीजिए और दुनिया व आख़िरत की भलाइयां हम पर आम फ़रमा दीजिए कि इस सूरत का नाम ’’मुअम्मा‘‘ है और हमारी तमाम बलाएं और परेशानियां दूर फ़रमा दीजिए कि इस का नाम ’’मुदाफ़ेआ‘‘ है और इसकी बरकत से हमारी तमाम हाजतें पूरी फ़रमा दीजिए कि इसका नाम हज़रत ﷺ ने ’’क़ाज़िया‘‘ भी फ़रमाया है।