बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
___अज़ क़लम महमूदुलबारी
दिल को झंझोड़ देने वाला सबक आमोज़
कौवा और मोर की कहानी —
एक घने जंगल में एक कौवा अपनी आज़ादी के साथ खुश व खुर्रम ज़िन्दगी गुज़ार रहा था। न कोई क़ैद, न कोई रोक टोक, बस हंसी ख़ुशी के दिन।
एक दिन उस की नज़र एक हसीन मोर पर पड़ी। मोर की खूबसूरती और रंगीन परों को देख कर कौवा के दिल में हसद की आग भड़क उठी। उस ने सोचा:
"काश! मैं भी मोर की तरह खूबसूरत होता तो सब मेरी तारीफ करते।"
कुछ दिनों बाद कौवा को एक जगह मुख्तलिफ़ रंगों की स्याही के डिब्बे मिले। मौक़ा देख कर वो उन में लोटने लगा। जब वो बाहर निकला तो उस के परों पर रंग चढ़ चुके थे। आईने में खुद को देख कर वो ख़ुशी से निहाल हो गया:
"वाह! अब मैं भी मोर लगता हूँ!"
यह खुश फहमी ले कर वो मोरों के झुंड में जा पहुंचा। इब्तिदा में सब कुछ ठीक चलता रहा। वो मोरों के साथ घूमता, मज़े करता और अपने नए रूप पर फख्र महसूस करता।
मगर एक दिन आसमान पर बादल छा गए और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। पानी के साथ सारी स्याही बह गई और कौवे का असल रंग ज़ाहिर हो गया। मोरों ने हकीकत जानते ही उस की खूब मरम्मत की और अपने गिरोह से निकाल दिया। अब कौवा न मोरों का रहा, न अपनी पहचान का।
पैग़ाम:
आज के ज़माने में भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो अपनी असल को छुपा कर किसी जमात, तहरीक या मज़हबी तबके का लिबादा ओढ़ लेते हैं, सिर्फ अपने मुफ़ाद के लिए। बाज़ सादा लोग उन के ज़ाहिर से मुतास्सिर हो कर धोखे में आ जाते हैं।
मेरे भाइयो!
यह सिर्फ कहानी नहीं, यह आज के दौर का सच है! आज भी ऐसे लोग हैं जो दीन का लिबादा ओढ़ लेते हैं! जो सिर्फ वक्ती फायदा उठाने के लिए जब्बा व दस्तार पहन लेते हैं! जो मेम्बर रसूल पर बैठ जाते हैं, हालानके न वो मुफ़्ती हैं, न आलिम, न सनद याफ्ता! यह दीन फ़रोश लोग मुआशरे को गुमराह करते हैं, ईमान लूटते हैं!
सवाल यह है: हम कहां खड़े हैं?
क्या हम उन के धोखे में आएंगे? क्या हम अपनी आंखें बंद कर लेंगे?
नहीं भाइयो! हरगिज़ नहीं! हम ऐसे धोखे बाज़ों को पहचानेंगे, हम उन से दूर रहेंगे!
हम अपने मोतबर उलमा से रहनुमाई लेंगे! हम अपने ईमान और समाज की हिफाज़त करेंगे!
याद रखो!
जो लोग दीन के नाम पर धोखा देते हैं, उन का अंजाम कौवे जैसा है! आज लोग उन को सलाम करते हैं, कल उन को ज़लील व ख़्वार कर दिया जाएगा!
लिहाज़ा मैं आप से अपील करता हूँ:
📢 आज अहद करो! हम ऐसे चालाक, बद दिमाग, लालची लोगों से बचेंगे! अपने घरों को बचाएंगे! अपने बच्चों के ईमान को महफूज़ रखेंगे!
📢 आज अहद करो! हम दीन को दुनिया के लालच के लिए इस्तेमाल करने वालों का साथ नहीं देंगे!
अल्लाह तआला हम सब को हक़ पहचानने, बातिल से बचने, और अपने ईमान की हिफाज़त करने की तौफीक अता फरमाए!
आमीन, सुम्मा आमीन!
वस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह व बरकातहू