एक बार खलीफा हारून अल रशीद अब्बासी ने काज़ी इमाम अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह से पूछा कि फालूदा और लौज़िना (यह एक उच्च किस्म का हलवा था) के बारे में आपका क्या फैसला है? दोनों में कौन सा आला है ?
आप ने कहा
ए अमीरुल मोमिनीन! दोनों फरीक जब तक हाज़िर न हों मैं फैसला नहीं करता'' खलीफा हारून अल रशीद अब्बासी ने दोनों चीजें मंगवा दीं, अब इमाम अबू युसूफ ने लुकमा पर लुकमा मारना शुरू कर दिया ,कभी फालूदा में से खाते और कभी लौज़िना में से ,जब दोनों प्याले आधे कर दिए तो बोले "ए अमीरुल मोमिनीन !मैंने अब तक कोई दो मुद-ए-मुकाबिल इनसे ज्यादा लड़ने वाले नहीं देखे जब भी मैंने एक के हक में फैसला देने का इरादा किया तो दूसरे ने फौरन अपनी दलील पेश कर दी
रमजानुल मुबारक २७
आप ने कहा
ए अमीरुल मोमिनीन! दोनों फरीक जब तक हाज़िर न हों मैं फैसला नहीं करता'' खलीफा हारून अल रशीद अब्बासी ने दोनों चीजें मंगवा दीं, अब इमाम अबू युसूफ ने लुकमा पर लुकमा मारना शुरू कर दिया ,कभी फालूदा में से खाते और कभी लौज़िना में से ,जब दोनों प्याले आधे कर दिए तो बोले "ए अमीरुल मोमिनीन !मैंने अब तक कोई दो मुद-ए-मुकाबिल इनसे ज्यादा लड़ने वाले नहीं देखे जब भी मैंने एक के हक में फैसला देने का इरादा किया तो दूसरे ने फौरन अपनी दलील पेश कर दी
रमजानुल मुबारक २७