⏳🏆⏳




       शैतान का वर्किंग स्टाइल ___!!
 
कहते हैं कि शैतान का अपना एक वर्किंग स्टाइल होता है। वह बुराई की डोरी का एक सिरा हिलाता है और बाकी का काम उस का मखलूक खुदा कर देती है। एक हिकायत पढ़ी थी कहीं तो सोचा आप के साथ भी शेयर कर लूं।

हुआ कुछ यूं कि एक बुजुर्ग की बाज़ार में शैतान से मुलाक़ात हो गई। बुजुर्ग ने शिकवा किया कि आज कल तुम मखलूक खुदा को बेहद वरगला रहे हो । शैतान बोला "जनाब मैं तो बस ऐसे ही बदनाम हो गया हूं वरना मैं तो पहले बहुत गुनाहगार हूं, इस लिए कम से कम गुनाह पर इक्तफ़ा करता हूं" बुजुर्ग ने हैरानी से पूछा "फिर यह जो शैतानी धंधे तेज़ तर हो गए हैं। यह किस ने फैलाए हैं" शैतान ने कहा कि हज़रत मैं आप को मिसाल से समझाता हूं। शैतान ने बाज़ार में हलवाई के उबलते घी में उंगली डाली और वह उंगली दीवार पर रगड़ दी। इतनी देर में बहुत सी मक्खियां दीवार पर लगे घी पर जा बैठीं। जिन को देख कर एक छिपकली लपकी। छिपकली को देख कर हलवाई की बिल्ली ने छिपकली पर जम्प किया। निशाना खता गया और बिल्ली उबलते घी में जा गिरी। हलवाई ने बिल्ली बचाने वास्ते घी की कढ़ाई उलट दी। बिल्ली तो न बची अलबत्ता नीचे बैठा कुत्ता ज़रूर फ्राई हो गया जिस पर उबलता घी गिरा था। कुत्ते के मालिक ने जब यह देखा तो उस ने तलवार निकाल कर हलवाई का काम तमाम कर दिया। हलवाई की मौत पर सब दुकानदार इकट्ठे हो गए और उन्होंने उस कुत्ते के मालिक को मार डाला। वह कुत्ते का मालिक एक फौजी था और उस की फौज शहर के बाहर पड़ाव लगाए बैठी थी। उन तक जब अपने फौजी की हलाकत की खबर पहुंची तो वह तैश में आ गए और उन्होंने सारे शहर को तहस नहस कर दिया।

तब शैतान ने बुजुर्ग से कहा "बाबा जी, अब बोलो, अब मेरा कितना जुर्म था इन वाक़्यात में?" तो बुजुर्ग बेचारे खामोशी से अपनी राह हो लिए।

मोअज़्ज़ज़ अहबाब से गुज़ारिश है कि तमाम मलबे शैतान पर फेंकने से क़ब्ल कभी अपने फैसलों पर भी नज़र डाल लिया करें।