ईरानी नेता रुख़सत हो गए, अब तो बुज़दिल हुक्मरान मज़ीद ज़िल्लत का सामना करेंगे, फ़र्ज़ान इब्लीस ख़ुशी में नहा गए, अहले नज़र में ग़म की लहर है, वो तो अपनी ज़िंदगी के आख़िरी साँसें कुफ़्र के ख़िलाफ़ सिर्फ़ कर गया, हज़ार मज़हबी इख़्तिलाफ़ सही, ये बात अपनी जगह पर कि वो हज़ारों सुन्नी मुस्लिम के क़ातिल थे, शियाई थे, असना अशरी थे जो फ़िर्का बाल-इत्तिफ़ाक़ काफ़िर है, _इन अल्लाह लियुअय्यिदुद्दीन बिर्रजुलिल फ़ाजिर_ हदीस रहनुमा है तथापि उनका ज़ाती मामला बारगाहे इज़दी में क्या हुआ, वो शहीद है या मलऊन ? सब ख़ुदा हवाला मगर इस्लाम की जो ख़िदमत उसने की, बैतुल मुक़द्दस और अहले बैतुल मुक़द्दस की जो मुआवनत उसने की वो सुन्नियों पर तमांचा है, एक अकेला कुफ़्र के मुक़ाबले सीना सिपर रहा, तन तनहा इवाने बातिल को लरज़ता रहा, कुफ़्र को मजबूरन मिल कर मौत के घाट उतारना पड़ा, उसने गर्दन कटा दी मगर कभी झुकाई नहीं, सब सुन्नी हुक्मरान तमाशाई बने रहे, गीदड़ बने रहे, ये तो अब और पस्तियाँ दर्ज कराएंगे, इत्तेहाद क़ायम करना उनकी शाने किब्रियाई के ख़िलाफ़ है और तो और अफ़सोस सद अफ़सोस इस दरम्यान दो रियासतें जिन का मक़सद-ए-क़ियाम महज़ इस्लामी निज़ाम था वो आपस में मुक़द्दस माह में ज़ोर आज़माई कर रहे हैं, वाह रे वाह वो भी अपने आप को ज_ह_आद की तसल्ली देते हुए, ये इस्लाम के ठेकेदार हैं? क्या ये इस्लाम का सही तसव्वुर दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं? कुफ़्र तो इन्हें मज़ीद भड़का रहा है, वो तो ख़ुश है, वो कब चाहेगा इत्तेहादे मुस्लिम? वो तो ऐसे ही लड़ाएगा और दूसरी तरफ़ अपना मक़सद पूरा कर लेगा, ख़िलाफ़ आने वाली हर ताक़त को ज़ेर करेगा, 
 
हालते ज़ार ये है कि मुस्लिम में ज़ेरे बहस मसला है कि "वो शिया था" वो काफ़िर है या नहीं ,  वो तो मुत्तफ़िक़ अलैह है, कोई दो राय नहीं, ये मोड़ मसलकी इख़्तिलाफ़ का नहीं, और कुफ़्र को इससे क्या मतलब?? 
वो तो एक मुस्लिम होने की हैसियत से उसे ख़त्म करने पर है, यही वजह है कि एशिया की  दो बड़ी ताक़तें कुफ़्र के मुक़ाबिल नहीं आ रही है 
  कुफ़्र एक एक करके सब को निशाना बनाते जा रहा है और मुस्लिम इत्तेहाद नहीं करते, बुज़दिल बने बैठे हैं 

  सूरते हाल पर ग़ौर करके सही सिम्त जाने की ज़रूरत है, होश के नाखून लेने की ज़रूरत है वरना ऐसी ही हालत रही तो सब यके बाद दीगरे कुफ़्र का निशाना बनते रहेंगे, इसी बुज़दिली के साथ दारे फ़ानी से कूच करेंगे, अभी एक ताक़त कुफ़्र ने ज़ेरे क़दम किया, अब किस का नंबर है?  

ख़ुदा ख़ैर करे, आफ़ियत का मामला करे, अहले इस्लाम में इत्तेहाद पैदा करे, मिल्लत के शीराज़ा को मज़ीद बिखरने से बचाए आमीन

✍️ इब्ने अनवर
१٨ रमज़ानुल मुबारक ١٤٤٦
 ٨  मार्च ٢٠२٦
बरोज़ इतवार