मुझे कभी कभी मर्द जात की ज़िंदगी पे बहुत तरस आता है
मर्द दुनिया की वो वाहिद जात है जिस को अल्लाह ने सब से ज़्यादा हिम्मत और हौसले से नवाज़ा है, मर्द अपनी सारी ज़िंदगी दूसरों को खुश करने में लगा देता है
और अपनी खुशी भी दूसरों की खुशी में ढूंढता रहता है।
जैसे ही बेटा पैदा होता है तो यही कहा जाता है कि हमारा वारिस बनेगा हमें संभालेगा घर संभालेगा काम करेगा सहारा बनेगा
मर्द की ज़िंदगी थकन से शुरू होकर थकन पे खत्म हो जाती है
ज़रा सा होश संभाला तो मां बाप के लिए कमाने निकल गया
बहनें जवान हुई तो बहनों की शादियों के लिए पैसा कमाता और जमा करता रहा
अपनी शादी भी अपने ही कमाए पैसों से करदी उसके बाद मज़ीद पहले से ज़्यादा कमाने की सोचना शुरू कर देना कि घर है मां बाप है बीवी है बच्चे हैं फिर इन सब के लिए कमाने लगा।
और मासूम इतना कि औलाद की कामयाबी पे ही अपनी थकन को दूर कर दिया
फिर कमाने लगा औलाद को पढ़ाने के लिए इनका मुस्तक़बिल बनाने के लिए।
सच में कितनी थकन भरी ज़िंदगी है
और वो लोग जिनके यहां मुलाज़िमीन हैं ख़ुदारा इनके साथ नरमी और शफ़क़त से पेश आएं क्योंकि जो आपके घर का नौकर है वो अपने घर का मालिक है।
आयशा ❤