शहीद-ए-बद्र  
वह तीन सौ तेरह थे
लर्ज़ उठा उनके रौब से ज़माना
हम अरबों होकर भी आज ज़लील हैं
क्या इसकी वजह आपने सोची ?
जब ऐसी बात की जाए तो क्या जाता है कि जी हमने दीन छोड़ दिया  
कौनसा दीन का अहम रुक्न आपने छोड़ा है  
जी जिहाद जैसा मुक़द्दस फ़रीज़ा छोड़कर बैठे हैं  

وَقَاتِلُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ الَّذِينَ يُقَاتِلُونَكُمْ وَلَا تَعْتَدُوا ۚ إِنَّ اللَّهَ
 لَا يُحِبُّ الْمُعْتَدِينَ

وَاقْتُلُوهُمْ حَيْثُ ثَقِفْتُمُوهُمْ وَأَخْرِجُوهُم مِّنْ حَيْثُ أَخْرَجُوكُمْ وَالْفِتْنَةُ أَشَدُّ مِنَ الْقَتْلِ

وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ لِلَّهِ

كُتِبَ عَلَيْكُمُ الْقِتَالُ وَهُوَ كُرْهٌ لَّكُمْ

وَمَا لَكُمْ لَا تُقَاتِلُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَالْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ الرِّجَالِ وَالنِّسَاءِ وَالْوِلْدَانِ

يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ إِن يَكُن مِّنكُمْ عِشْرُونَ صَابِرُونَ يَغْلِبُوا مِائَتَيْنِ ۚ وَإِن يَكُن مِّنكُم مِّائَةٌ يَغْلِبُوا أَلْفًا مِّنَ الَّذِينَ كَفَرُوا بِأَنَّهُمْ قَوْمٌ لَّا يَفْقَهُونَ

नबी को हुक्म है कि जिहाद पर उभारिए
मगर हमने यह मुक़द्दस फ़रीज़ा छोड़ दिया सिर्फ़ छोड़ा नहीं बल्कि अदा करने वालों का मज़ाक़ उड़ाया गया  
आज हम मार्शल आर्ट्स सीखने जाते हैं  
हालांकि क़ुरान मजीद में है  

فَوَكَزَهُ مُوسَىٰ فَقَضَىٰ عَلَيْهِ

मुक्का मारा हलाक हो गया  
यह हमें मूसा अलैहिस्सलाम के फ़ेल से पता चला कि दुश्मन की तंबीह और मज़लूम की मदद पर लब्बैक कहो
और ऐसा मारो कि

فَاضْرِبُوا فَوْقَ الْأَعْنَاقِ وَاضْرِبُوا مِنْهُمْ كُلَّ بَنَانٍ

जी ग़ज़वा-ए-बद्र हमें याद दिलाता है कि उठो  
ग़ज़्ज़ा पुकार रहा है  
कश्मीर की माँ पुकार रही है  
चीचन्या
बर्मा
इराक़  
पुकार रहा है  
हमारी बहनों की इज़्ज़तें पामाल की जा रही हैं  
हमारे बच्चों को ज़बह किया जा रहा है  
याद रखें जिहाद कुफ्फार के ख़िलाफ़ होता है  
मुसलमान की तरफ़ हथियार उठाने से भी मना किया गया है  
आप अलैहिस्सलातो वस्सलाम ने कभी किसी मुनाफ़िक़ को नहीं मारा बावजूद यह कि आप जानते थे उनके निफ़ाक़ को
इरशाद फ़रमाया कि  
أُمِرْتُ أَنْ أُقَاتِلَ النَّاسَ حَتَّى يَقُولُوا: لَا إِلٰهَ إِلَّا اللَّهُ، فَإِذَا قَالُوها عَصَمُوا مِنِّي دِمَاءَهُمْ وَأَمْوَالَهُمْ إِلَّا بِحَقِّهَا، وَحِسَابُهُمْ عَلَى اللَّهِ. 
तर्जुमा  
मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं लोगों से लड़ूँ (जंग करूँ) यहाँ तक कि वह कहें   : ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ यानी अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं।
जब वह ऐसा कहेंगे तो उनके ख़ून (ज़िंदगी) और माल मेरे लिए महफ़ूज़ हो जाएँगे।
सिवाए इसके जो इस्लाम के हक़ में हो (मसलन ज़कात जैसे क़ानूनी हक़ की अदायगी), और उनका हिसाब अल्लाह के ज़िम्मे है।
अल्लाहु अकबर  
इस्लाम की पहली जंग  
पहले शोहदा-ए-किराम को एज़ाज़ मिला
क़यामत की सुबह तक को भी इनके नाम ले कर अल्लाह तआला को पुकारेगा अल्लाह उसकी दुआ ज़रूर क़बूल करेंगे  
इंशा अल्लाह  
आइए कभी आपको मैदान-ए-जिहाद में ले कर चलते हैं  
शोहदा-ए-इकराम के ख़ून से ख़ुशबू का आना
बदन का तरोताज़ा रहना  
अल्लाहु अकबर  
आज से हम भी अहद करें  
जिहाद ⚔️ फ़ी सबील अल्लाह का
और उलमा-ए-किराम नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की इस विरासत को संभालें  

يَا أَيُّهَا النَّبِيُّ حَرِّضِ الْمُؤْمِنِينَ عَلَى الْقِتَالِ ۚ 

अल्लाह तआला हमें क़ुरान व सुन्नत के उसूलों के मुताबिक़ मुजाहिद बनाए  
اللَّهُمَّ اجعلنا من المجاهدين في سبيلك، وارزقنا الشهادة في الدنيا والآخرة، ووفِّقنا للطاعة والصدق والإخلاص، واحشرنا مع الصالحين.
आमीन या रब्बुल आलमीन