*शहज़ादों का इम्तिहान*
*(बच्चों के लिए दिलचस्प, हैरतअंगेज़ और सबक आमोज़ कहानी)*
*क़िस्त नंबर 10*
दरिया पर जाने के बाद शहज़ादा उसके पानी से फ़ायदा उठाने के बारे में सोचता रहता था। एक दिन अचानक उसके ज़ेहन में एक तरकीब आ गई। वह दरिया के किनारे पर बुलंदी की जानिब चलने लगा। चलते चलते वह एक ऐसी जगह पहुँच गया जो उसकी बस्तियों से ऊँची थी। यहाँ से सारी बस्तियों को आसानी से देखा जा सकता था। उसके दिमाग़ में जो तरकीब आई थी, उसे अमली जामा पहनाने का वक़्त आ गया था। अगले दिन उसने अपने मंसूबे के मुताबिक़ सारी बस्तियों में हर गली के सामने दो छोटी छोटी नालियाँ और दरमियान में नहरें खोदने का आग़ाज़ कर दिया। इनके मुकम्मल होने में सिर्फ़ एक हफ़्ता सर्फ़ हुआ। शहज़ादे ने इनका जायज़ा लिया। हर बस्ती की नहरों और नालियों का रुख़ दरिया की तरफ़ था। इसके बाद शहज़ादे ने हर बस्ती के बाहर एक बड़ा सा तालाब बनवाया जिसमें पानी ज़ख़ीरा हो सकता था। वह इस सारे काम का रोज़ाना जायज़ा लेता रहता और इसमें बेहतरी लाता रहता। बस्ती के लोग इस मंसूबे के मक़सद से ला इल्म थे। आख़िर एक दिन शहज़ादे ने सारी बस्तियों से अहम लोगों को दावत पर बुलाया। उसने उनको बताया कि हम दरिया के पानी का रुख़ मोड़ कर इसे इन नहरों और नालियों से गुज़ारेंगे जो बस्तियों के घरों और गलियों में बनाई गई हैं। इससे औरतों को पानी लाने के लिए जो मशक़्क़त उठानी पड़ती है, वह इससे बच जाएँगी और खेतों के लिए भी हर वक़्त पानी दस्तयाब होगा। जब शहज़ादे के मंसूबे के बारे में लोगों को इल्म हुआ तो वह शहज़ादे की बहादुरी के साथ उसकी अक़्ल मंदी के भी क़ाइल हो गए। फिर एक दिन बहुत से लोगों की एक जमात ने एक ऊँची जगह से दरिया के कुछ पानी का रुख़ बड़े तालाब की तरफ़ मोड़ दिया। पानी अपनी पूरी रफ़्तार से तालाब में जमा हुआ और फिर देखते ही देखते बस्तियों की गलियों में बनी हुई नहरों में बहने लगा। बस्तियों के लोगों के दिलों से शहज़ादे के लिए बे इख़्तियार दुआएँ निकलने लगीं। शहज़ादे के इस इक़दाम से बस्तियाँ तेज़ी से तरक़्क़ी करने लगीं।
एक दिन शहज़ादा अपने लिए बनाए गए महल में जंगी मशक़ें कर रहा था। मौसम बड़ा सुहाना हो रहा था। वह सोच रहा था कि आज शिकार के लिए पहाड़ों की तरफ़ जाए गा। इसी अस्ना में उसका ख़ास आदमी घबराया हुआ अंदर दाख़िल हुआ:
"जनाब! एक बुरी ख़बर है।"
शहज़ादा मशक़ छोड़ कर उसकी तरफ़ मुतवज्जेह हुआ:
"क्या हो गया है? क्या कोई आफ़त आ गई है?"
शहज़ादे ने मज़ाक़ के लहजे में कहा तो वह आदमी बोला:
"जनाब! दरिया पार के मुल्क से बादशाह का एलची आया है। वह कह रहा है कि इन बस्तियों की हुकूमत हमारे हवाले कर दी जाए, दूसरी सूरत में वह हमें नीस्त व नाबूद कर देगा!"
फ़ौरन यह सुन कर शहज़ादे ने कहा कि एलची को फ़ौरन मेरे सामने हाज़िर किया जाए। चंद लम्हों बाद एक आदमी अंदर दाख़िल हुआ। उसने बहुत क़ीमती लिबास पहन रखा था और चेहरे से मक्कार नज़र आता था।
"कहो, क्या कहना चाहते हो?" शहज़ादे ने बैठते हुए सवाल किया।
वह आदमी तकब्बुर से बोला:
"मैं दरिया पार के मुल्क से आया हूँ और वहाँ के बादशाह का ख़ास एलची हूँ। बादशाह का हुक्म है कि आप यहाँ की हुकूमत हमारे हवाले कर दें, इसी में आपका फ़ायदा है।"
उसकी बातें सुन कर शहज़ादे को ख़तरे का एहसास होने लगा:
"अगर हम ऐसा न करें तो तुम्हारा बादशाह हमारा क्या बिगाड़ लेगा?"
शहज़ादे ने उसे ग़ुस्सा दिला कर उनका मंसूबा जानने की ग़रज़ से कहा।
वह बोला:
"हमारा बादशाह बहुत ताक़त वर है, और उसके पास जादूगरों की ताक़त भी है, जो अपने जादू के ज़ोर से नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं।"
उसने फ़ख़्र से कहा और शहज़ादा गहरी सोच में डूब गया। एक नया और मुश्किल इम्तिहान उसके सामने खड़ा था।
*बादशाह की दुआ*
बादशाह को अपना तख़्त ओ ताज छोड़े हुए पाँच महीने हो चुके थे। बादशाह और मलिका एक एक दिन गिन कर गुज़ार रहे थे। मेहनत मज़दूरी करते करते दोनों की हालत ख़राब थी। वह सोच रहा था कि कहीं मैं ने शहज़ादों को इम्तिहान में डाल कर ग़लती तो नहीं कर दी? मलिका उसकी ढाढ़स बंधाती, मगर बादशाह हर वक़्त शहज़ादों को याद करता रहता। उसे अपने मुल्क के ख़राब होते हुए हालात और रईया की फ़िक्र थी। मुल्क में अमन ओ अमान की हालत ख़राब थी। ग़िज़ा वज़ीर के लोग रईया को नाहक़ तंग करते थे और उनकी जायदादों पर क़ब्ज़ा कर लेते थे। जब बादशाह किसी गाँव या शहर की तरफ़ हो जाता तो लोग उसे याद कर रहे होते। वह दुआ करते कि अल्लाह उन्हें अपना बादशाह दोबारा वापस कर दे। बादशाह अपनी रईया से बहुत मोहब्बत करता था लेकिन उन्हें अपना राज़ बताने से क़ासिर था।
अब तो ग़िज़ा वज़ीर के साथी सर-ए-आम दिन के वक़्त भी लूट मार करने लगे थे और जो शख़्स मुज़ाहमत करता, उसे क़त्ल करने से भी دریغ न करते। बादशाह से रईया की यह हालत देखी न जाती थी और वह अपने आप को इस सारी सूरत हाल का ज़िम्मेदार समझता था। रात को अपनी कुटिया में वापस आ कर वह ज़ार ओ क़तार रोता और अल्लाह से मदद की दुआ करता। छः महीने पूरे होने में कुछ ज़्यादा दिन बाक़ी नहीं थे। उसे मालूम था कि जब शहज़ादे वापस आएँगे तो इन तीनों में बहादुरी, अक़्ल मंदी और रहम दिली जैसी तमाम खुसूसियत पैदा हो चुकी होंगी।
*रहम दिल शहज़ादा और नाग जिन*
तलवार रहम दिल शहज़ादे से थोड़ी दूर गिरी थी। अंधेरे की वजह से सिर्फ़ दो चीज़ें नज़र आ रही थीं। एक तलवार और दूसरी नाग की ग़ुस्सेली आँखें। शहज़ादे और तलवार के दरमियान काला नाग फन फैलाए खड़ा था और किसी भी लम्हे उसे डस सकता था। मौत को सामने देख कर शहज़ादे में ताक़त आ गई। जब नाग ने उसे डसने के लिए छलांग लगाई तो शहज़ादे ने आख़िरी कोशिश के तौर पर खिसक कर तलवार की तरफ़ छलांग लगा दी। नाग अपने ही ज़ोर में ग़ार की दीवार से जा टकराया। इस दौरान शहज़ादे ने तलवार पर क़ब्ज़ा कर लिया था। उसने फ़ौरन नाग की दुम पर तलवार का वार कर दिया। दुम कटते ही ग़ार में भूचाल आ गया। हर तरफ़ "आदम बू, आदम बू, आदम बू" की आवाज़ें गूँजने लगीं। शहज़ादा समझ गया कि नाग के ज़ख़मी होते ही जिन को उसकी ख़बर हो गई है और वह यहाँ पहुँचने वाला है। उसकी जान नाग में थी और अब नाग का खात्मा जल्द अज़ जल्द करना था। ज़ख़मी नाग बिल खा कर मुड़ा और शहज़ादे पर छलांग लगा दी। शहज़ादे ने उसकी आँखों का निशाना ले कर तलवार को पूरी ताक़त से घुमाया। नाग का सर कट कर अंधेरे में ग़ायब हो गया और हर तरफ़ से पत्थर गिरने लगे। शहज़ादा ग़ार के दहाने पर था। वह ग़ार से बाहर कूद गया। बाहर भी एक तूफ़ान का समाँ था। तेज़ हवाओं के बगूले उठ रहे थे, जो आसमान की बुलंदी तक जाते थे। ज़मीन हिलने लगी और पहाड़ रूई के गालों की तरह टूट टूट कर उड़ने लगे। शहज़ादे के ज़ेहन पर भी तारीकी छाने लगी और फिर वह चकरा कर गिर पड़ा। उसे किसी चीज़ का कोई होश न रहा था।
*रा बेल जादूगर का ख़ौफ़नाक मंसूबा*
रहम दिल शहज़ादे की रवानगी के बाद रा बेल के दरबार में नामी गिरामी जादूगर जमा थे। वह शहज़ादे को ज़ालिम जिन की जान वाले काले नाग के खात्मे के लिए छोड़ आए थे। उन्हें शहज़ादे की कामयाबी का पूरा यक़ीन था। इस कामयाबी के बाद वह अपना आइंदा का मंसूबा बनाने के लिए इकट्ठे हुए थे। एक जादूगर ने रा बेल को दरिया के पार बनने वाली नई बस्तियों के बारे में बताया था। उसके मुताबिक़ यह बस्तियाँ चार पाँच महीनों के अंदर अंदर माल ओ दौलत से भर गई थीं। वहाँ की बस्तियों का बादशाह एक नौजवान था, जिसने इन सब को मुत्तहिद कर दिया था। इस जादूगर ने दरिया के पार आबाद बस्तियों की तमाम खुसूसियत से रा बेल को आगाह किया। बस्तियों की फ़सलों और बाग़ात के बारे में सुन कर रा बेल के शैतानी ज़ेहन में एक ख़तरनाक मंसूबा तैयार हो गया।
उसने अपने ख़ास ख़ास जादूगरों को बुला कर इस मंसूबे को मुकम्मल करने के बारे में मशवरे लेने शुरू कर दिए। जादूगरों के उस्ताद ने रा बेल को कहा कि सब से पहले एक जादूगर को एलची बना कर वहाँ के नौजवान बादशाह के पास भेजा जाए। अगर वह खुद अपनी बस्तियाँ हमारे हवाले करने पर रज़ा मंद हो जाए तो ठीक है। दूसरी सूरत में हमारे जादूगरों की फ़ौज वहाँ के लोगों पर जादू कर के उन्हें पत्थर का बना देगी। फिर इन के दिमाग़ पर क़ाबू पाया जाएगा, जिस की वजह से वह सब हमारे फ़रमाँ बरदार बन जाएँगे।
रा बेल को बूढ़े जादूगर की तजवीज़ पसंद आई। बस्तियों के नौजवान बादशाह को पैग़ाम देने के लिए एक मक्कार जादूगर को मुंतख़ब किया गया। इसी दौरान उन्हें जिन की मौत की ख़बर मिल गई। बूढ़ा जादूगर ख़ुशी से नाचने लगा और वहाँ जश्न मनाया जाने लगा। फिर रा बेल को शहज़ादे का ख़याल आया। बूढ़े जादूगर ने मशवरा दिया कि अब वह इंसान हमारे काम का नहीं रहा, इसलिए उसे वापस लाने की क्या ज़रूरत है? लेकिन रा बेल ने कहा कि शायद फिर भी ज़रूरत पड़ जाए, लहٰذا इसी वक़्त एक जादूगर को शहज़ादे की वापसी के लिए रवाना कर दिया गया। जल्द ही जादूगर की वापसी हो गई। शहज़ादा बेहोश था और जादूगर ने उसे कंधे पर डाल रखा था। शहज़ादे के हाथ में तलवार देख कर सब चौंक उठे। हर कोई यही समझ रहा था कि हो सकता है किसी जादूगर ने उसे तलवार दी हो, मगर किसी ने तलवार के मुताल्लिक़ सवाल नहीं किया। रा बेल के हुक्म पर शहज़ादे को इसी हालत में एक कमरे में लिटा दिया गया और मक्कार जादूगर पैग़ाम देने रवाना हो गया।
*जारी है ।۔۔۔۔////*
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*शहज़ादों का इम्तिहान*
*(बच्चों के लिए दिलचस्प, हैरतअंगेज़ और सबक आमोज़ कहानी)*
*क़िस्त नंबर 10*
दरिया पर जाने के बाद शहज़ादा उसके पानी से फ़ायदा उठाने के बारे में सोचता रहता था। एक दिन अचानक उसके ज़ेहन में एक तरकीब आ गई। वह दरिया के किनारे पर बुलंदी की जानिब चलने लगा। चलते चलते वह एक ऐसी जगह पहुँच गया जो उसकी बस्तियों से ऊंची थी। यहां से सारी बस्तियों को आसानी से देखा जा सकता था। उसके दिमाग़ में जो तरकीब आई थी, उसे अमली जामा पहनाने का वक़्त आ गया था। अगले दिन उसने अपने मंसूबे के मुताबिक़ सारी बस्तियों में हर गली के सामने दो छोटी छोटी नालियां और दरमियान में नहरें खोदने का आग़ाज़ कर दिया। इनके मुकम्मल होने में सिर्फ़ एक हफ़्ता सर्फ़ हुआ। शहज़ादे ने इनका जायज़ा लिया। हर बस्ती की नहरों और नालियों का रुख़ दरिया की तरफ़ था। इसके बाद शहज़ादे ने हर बस्ती के बाहर एक बड़ा सा तालाब बनवाया जिसमें पानी ज़ख़ीरा हो सकता था। वह इस सारे काम का रोज़ाना जायज़ा लेता रहता और इसमें बेहतरी लाता रहता। बस्ती के लोग इस मंसूबे के मक़सद से ला इल्म थे। आख़िर एक दिन शहज़ादे ने सारी बस्तियों से अहम लोगों को दावत पर बुलाया। उसने उनको बताया कि हम दरिया के पानी का रुख़ मोड़ कर इसे इन नहरों और नालियों से गुज़ारेंगे जो बस्तियों के घरों और गलियों में बनाई गई हैं। इससे औरतों को पानी लाने के लिए जो मशक़्क़त उठानी पड़ती है, वह इससे बच जाएंगी और खेतों के लिए भी हर वक़्त पानी दस्तयाब होगा। जब शहज़ादे के मंसूबे के बारे में लोगों को इल्म हुआ तो वह शहज़ादे की बहादुरी के साथ उसकी अक़्ल मंदी के भी क़ाइल हो गए। फिर एक दिन बहुत से लोगों की एक जमात ने एक ऊंची जगह से दरिया के कुछ पानी का रुख़ बड़े तालाब की तरफ़ मोड़ दिया। पानी अपनी पूरी रफ़्तार से तालाब में जमा हुआ और फिर देखते ही देखते बस्तियों की गलियों में बनी हुई नहरों में बहने लगा। बस्तियों के लोगों के दिलों से शहज़ादे के लिए बे इख़्तियार दुआएँ निकलने लगीं। शहज़ादे के इस इक़दाम से बस्तियाँ तेज़ी से तरक़्क़ी करने लगीं।
एक दिन शहज़ादा अपने लिए बनाए गए महल में जंगी मशक़ें कर रहा था। मौसम बड़ा सुहाना हो रहा था। वह सोच रहा था कि आज शिकार के लिए पहाड़ों की तरफ़ जाए गा। इसी अस्ना में उसका ख़ास आदमी घबराया हुआ अंदर दाख़िल हुआ:
"जनाब! एक बुरी ख़बर है।"
शहज़ादा मशक़ छोड़ कर उसकी तरफ़ मुतवज्जेह हुआ:
"क्या हो गया है? क्या कोई आफ़त आ गई है?"
शहज़ादे ने मज़ाक़ के लहजे में कहा तो वह आदमी बोला:
"जनाब! दरिया पार के मुल्क से बादशाह का एलची आया है। वह कह रहा है कि इन बस्तियों की हुकूमत हमारे हवाले कर दी जाए, दूसरी सूरत में वह हमें नीस्त व नाबूद कर देगा!"
फ़ौरन यह सुन कर शहज़ादे ने कहा कि एलची को फ़ौरन मेरे सामने हाज़िर किया जाए। चंद लम्हों बाद एक आदमी अंदर दाख़िल हुआ। उसने बहुत क़ीमती लिबास पहन रखा था और चेहरे से मक्कार नज़र आता था।
"कहो, क्या कहना चाहते हो?" शहज़ादे ने बैठते हुए सवाल किया।
वह आदमी तकब्बुर से बोला:
"मैं दरिया पार के मुल्क से आया हूँ और वहां के बादशाह का ख़ास एलची हूँ। बादशाह का हुक्म है कि आप यहां की हुकूमत हमारे हवाले कर दें, इसी में आपका फ़ायदा है।"
उसकी बातें सुन कर शहज़ादे को ख़तरे का एहसास होने लगा:
"अगर हम ऐसा न करें तो तुम्हारा बादशाह हमारा क्या बिगाड़ लेगा?"
शहज़ादे ने उसे ग़ुस्सा दिला कर उनका मंसूबा जानने की ग़रज़ से कहा।
वह बोला:
"हमारा बादशाह बहुत ताक़त वर है, और उसके पास जादूगरों की ताक़त भी है, जो अपने जादू के ज़ोर से नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं।"
उसने फ़ख़्र से कहा और शहज़ादा गहरी सोच में डूब गया। एक नया और मुश्किल इम्तिहान उसके सामने खड़ा था।
*बादशाह की दुआ*
बादशाह को अपना तख़्त ओ ताज छोड़े हुए पांच महीने हो चुके थे। बादशाह और मलिका एक एक दिन गिन कर गुज़ार रहे थे। मेहनत मज़दूरी करते करते दोनों की हालत ख़राब थी। वह सोच रहा था कि कहीं मैं ने शहज़ादों को इम्तिहान में डाल कर ग़लती तो नहीं कर दी? मलिका उसकी ढाढ़स बंधाती, मगर बादशाह हर वक़्त शहज़ादों को याद करता रहता। उसे अपने मुल्क के ख़राब होते हुए हालात और रईया की फ़िक्र थी। मुल्क में अमन ओ अमान की हालत ख़राब थी। ग़िज़ा वज़ीर के लोग रईया को नाहक़ तंग करते थे और उनकी जायदादों पर क़ब्ज़ा कर लेते थे। जब बादशाह किसी गाँव या शहर की तरफ़ हो जाता तो लोग उसे याद कर रहे होते। वह दुआ करते कि अल्लाह उन्हें अपना बादशाह दोबारा वापस कर दे। बादशाह अपनी रईया से बहुत मोहब्बत करता था लेकिन उन्हें अपना राज़ बताने से क़ासिर था।
अब तो ग़िज़ा वज़ीर के साथी सर-ए-आम दिन के वक़्त भी लूट मार करने लगे थे और जो शख़्स मुज़ाहमत करता, उसे क़त्ल करने से भी دریغ न करते। बादशाह से रईया की यह हालत देखी न जाती थी और वह अपने आप को इस सारी सूरत हाल का ज़िम्मेदार समझता था। रात को अपनी कुटिया में वापस आ कर वह ज़ार ओ क़तार रोता और अल्लाह से मदद की दुआ करता। छः महीने पूरे होने में कुछ ज़्यादा दिन बाक़ी नहीं थे। उसे मालूम था कि जब शहज़ादे वापस आएंगे तो इन तीनों में बहादुरी, अक़्ल मंदी और रहम दिली जैसी तमाम खुसूसियत पैदा हो चुकी होंगी।
*रहम दिल शहज़ादा और नाग जिन*
तलवार रहम दिल शहज़ादे से थोड़ी दूर गिरी थी। अंधेरे की वजह से सिर्फ़ दो चीज़ें नज़र आ रही थीं। एक तलवार और दूसरी नाग की ग़ुस्सेली आँखें। शहज़ादे और तलवार के दरमियान काला नाग फन फैलाए खड़ा था और किसी भी लम्हे उसे डस सकता था। मौत को सामने देख कर शहज़ादे में ताक़त आ गई। जब नाग ने उसे डसने के लिए छलांग लगाई तो शहज़ादे ने आख़िरी कोशिश के तौर पर खिसक कर तलवार की तरफ़ छलांग लगा दी। नाग अपने ही ज़ोर में ग़ार की दीवार से जा टकराया। इस दौरान शहज़ादे ने तलवार पर क़ब्ज़ा कर लिया था। उसने फ़ौरन नाग की दुम पर तलवार का वार कर दिया। दुम कटते ही ग़ार में भूचाल आ गया। हर तरफ़ "आदम बू, आदम बू, आदम बू" की आवाज़ें गूँजने लगीं। शहज़ादा समझ गया कि नाग के ज़ख़मी होते ही जिन को उसकी ख़बर हो गई है और वह यहां पहुँचने वाला है। उसकी जान नाग में थी और अब नाग का खात्मा जल्द अज़ जल्द करना था। ज़ख़मी नाग बिल खा कर मुड़ा और शहज़ादे पर छलांग लगा दी। शहज़ादे ने उसकी आँखों का निशाना ले कर तलवार को पूरी ताक़त से घुमाया। नाग का सर कट कर अंधेरे में ग़ायब हो गया और हर तरफ़ से पत्थर गिरने लगे। शहज़ादा ग़ार के दहाने पर था। वह ग़ार से बाहर कूद गया। बाहर भी एक तूफ़ान का समाँ था। तेज़ हवाओं के बगूले उठ रहे थे, जो आसमान की बुलंदी तक जाते थे। ज़मीन हिलने लगी और पहाड़ रूई के गालों की तरह टूट टूट कर उड़ने लगे। शहज़ादे के ज़ेहन पर भी तारीकी छाने लगी और फिर वह चकरा कर गिर पड़ा। उसे किसी चीज़ का कोई होश न रहा था।
*रा बेल जादूगर का ख़ौफ़नाक मंसूबा*
रहम दिल शहज़ादे की रवानगी के बाद रा बेल के दरबार में नामी गिरामी जादूगर जमा थे। वह शहज़ादे को ज़ालिम जिन की जान वाले काले नाग के खात्मे के लिए छोड़ आए थे। उन्हें शहज़ादे की कामयाबी का पूरा यक़ीन था। इस कामयाबी के बाद वह अपना आइंदा का मंसूबा बनाने के लिए इकट्ठे हुए थे। एक जादूगर ने रा बेल को दरिया के पार बनने वाली नई बस्तियों के बारे में बताया था। उसके मुताबिक़ यह बस्तियाँ चार पांच महीनों के अंदर अंदर माल ओ दौलत से भर गई थीं। वहां की बस्तियों का बादशाह एक नौजवान था, जिसने इन सब को मुत्तहिद कर दिया था। इस जादूगर ने दरिया के पार आबाद बस्तियों की तमाम खुसूसियत से रा बेल को आगाह किया। बस्तियों की फ़सलों और बाग़ात के बारे में सुन कर रा बेल के शैतानी ज़ेहन में एक ख़तरनाक मंसूबा तैयार हो गया।
उसने अपने ख़ास ख़ास जादूगरों को बुला कर इस मंसूबे को मुकम्मल करने के बारे में मशवरे लेने शुरू कर दिए। जादूगरों के उस्ताद ने रा बेल को कहा कि सब से पहले एक जादूगर को एलची बना कर वहां के नौजवान बादशाह के पास भेजा जाए। अगर वह खुद अपनी बस्तियाँ हमारे हवाले करने पर रज़ा मंद हो जाए तो ठीक है। दूसरी सूरत में हमारे जादूगरों की फ़ौज वहां के लोगों पर जादू कर के उन्हें पत्थर का बना देगी। फिर इन के दिमाग़ पर क़ाबू पाया जाएगा, जिस की वजह से वह सब हमारे फ़रमाँ बरदार बन जाएंगे।
रा बेल को बूढ़े जादूगर की तजवीज़ पसंद आई। बस्तियों के नौजवान बादशाह को पैग़ाम देने के लिए एक मक्कार जादूगर को मुंतख़ब किया गया। इसी दौरान उन्हें जिन की मौत की ख़बर मिल गई। बूढ़ा जादूगर ख़ुशी से नाचने लगा और वहां जश्न मनाया जाने लगा। फिर रा बेल को शहज़ादे का ख़याल आया। बूढ़े जादूगर ने मशवरा दिया कि अब वह इंसान हमारे काम का नहीं रहा, इसलिए उसे वापस लाने की क्या ज़रूरत है? लेकिन रा बेल ने कहा कि शायद फिर भी ज़रूरत पड़ जाए, लहٰذا इसी वक़्त एक जादूगर को शहज़ादे की वापसी के लिए रवाना कर दिया गया। जल्द ही जादूगर की वापसी हो गई। शहज़ादा बेहोश था और जादूगर ने उसे कंधे पर डाल रखा था। शहज़ादे के हाथ में तलवार देख कर सब चौंक उठे। हर कोई यही समझ रहा था कि हो सकता है किसी जादूगर ने उसे तलवार दी हो, मगर किसी ने तलवार के मुताल्लिक़ सवाल नहीं किया। रा बेल के हुक्म पर शहज़ादे को इसी हालत में एक कमरे में लिटा दिया गया और मक्कार जादूगर पैग़ाम देने रवाना हो गया।
*जारी है ।۔۔۔۔////*
🌸🤲🌼🌹♥️