बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
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==अज़ कलम महमूदुलबारी
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तलाक से पहले और बाद के इस्लामी व कानूनी उसूल
(इस्लाह, सब्र, और झूठे मुक़दमात से बचाव)
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1. शरीयत का उसूल – सब्र और हुस्न-ए-सुलूक
कुरान में हुक्म है:
"वअ़ाशिरूहुन्न बिल मारूफ" (अल-निसा:19)
यानी औरतों के साथ अच्छे तरीके से जिंदगी गुजारो।
नबी ﷺ ने फ़रमाया:
"तुम में सब से बेहतर वो है जो अपनी बीवी के साथ बेहतर हो" (तिरमिज़ी)।
शौहर का ये फ़र्ज़ है कि वो बर्दाश्त, नरमी और हुस्न-ए-सुलूक को इख्तियार करे। अलबत्ता अगर बीवी की बदज़बानी और बदसुलूकी हद से बढ़ जाए और शौहर की इज्ज़त और ज़ेहनी सुकून मजरूह होने लगे, तो शरीयत खामोश रहने का पाबंद नहीं करती।
2. बीवी की बदज़बानी के दर्जे
अगर सिर्फ वक्ती गुस्से में सख्त अल्फाज़ निकलें तो शौहर को सब्र करना चाहिए, इस्लाह की कोशिश करनी चाहिए।
अगर बीवी बार बार ज़लील करने वाली बातें करे और शौहर को ज़ेहनी तौर पर टूटने लगे तो ये संगीन मामला है जिस का हल तलाश करना ज़रूरी है।
3. इस्लाह के तरीके
1. नरम बात चीत:
बीवी को अकेले में मोहब्बत भरे अंदाज़ से समझाएं:
"मुझे तुम्हारी बातों से दुःख होता है, हम चाहें तो अपनी जिंदगी को सुकून भरी बना सकते हैं।"
2. वक्ती अलहदागी:
अगर बात बढ़ जाए तो कुछ वक़्त के लिए अलग कमरा या अलग रिहाइश इख्तियार करें ताकि झगड़ा मज़ीद न बढ़े।
3. खानदानी सालिसी:
कुरान (अल-निसा:35) के मुताबिक दोनों खानदान के नेक और समझदार अफ़राद को बिठा कर मसला हल करने की कोशिश करें।
4. मुसबत पहलू तलाश करना:
हदीस मुस्लिम में आया: अगर औरत में एक ऐब हो तो उस में कोई न कोई खूबी भी ज़रूर होगी। उन खूबियों को देखें।
5. हौसला अफ़ज़ाई (Appreciation Therapy):
बीवी की अच्छी बातों की तारीफ करें, इस से नरम मिजाज़ी पैदा होती है।
6. दीनी माहौल पैदा करना:
नमाज़ साथ पढ़ना, कुरान सुनना, दीनी मजलिस में शरीक होना, दिलों को जोड़ने का सबब बनता है।
7. माहिरिन से मुशावरत:
अगर मसला हल न हो तो आलिम-ए-दीन या काउंसलर की मदद लें।
8. तलाक – आखिरी हल:
जब सब रास्ते नाकाम हो जाएं तो तलाक दी जा सकती है, मगर जल्दबाज़ी में नहीं, सोच समझ कर।
4. मुअस्सिर जुमले
"मैं चाहता हूं कि हम दोनों की जिंदगी सुकून भरी हो, इस के लिए नरमी ज़रूरी है।"
"जब तुम सख्त बात करती हो तो दिल टूटता है, मैं चाहता हूं रिश्ता मोहब्बत पर कायम रहे।"
"आओ मिल कर फैसला करें कि हम एक दूसरे को दुःख नहीं देंगे।"
"रसूल ﷺ ने फ़रमाया सब से बेहतरीन शौहर वो है जो अपनी बीवी के लिए बेहतर हो, आओ हम दोनों बेहतरीन बनें।"
. तलाक के बाद. (5) . इस्लामी उसूल
1. शरई तरीका: तलाक तहरीरी हो, गवाहों के साथ, और दारुलकज़ा या आलिम की निगरानी में।
2. हुस्न-ए-सुलूक: अलहदागी के बाद भी बीवी की इज्ज़त-ए-नफ़्स मजरूह न करें।
3. हुकूक की अदायगी: मेहर, इद्दत का खर्च, बच्चों की कफ़ालत पूरी करें।
4. सब्र व दुआ: कुरान (अल-बकरह:153) "इन्नल्लाहा मअस साबिरीन..
5. कानूनी पहलू (हिंदुस्तानी क़वानीन)
498A IPC: जहेज़ का केस → दिफ़ा: जहेज़ न लेने के सुबूत।
DV Act 2005: घरेलू तशद्दुद का दावा → दिफ़ा: अलग रिहाइश, खर्च की अदायगी के कागजात।
Sec 125 CrPC: नान व नफ़्क़ा → दिफ़ा: बीवी अगर कमाने के काबिल हो या निकाह-ए-सानी करे तो खर्च ख़त्म।
Sec 406 IPC: जहेज़/सामान → दिफ़ा: वापसी की रसीद या गवाह।
Sec 9 Hindu Marriage Act: नाजायज़ अलहदागी → दिफ़ा: बीवी खुद गई या हालात नामुमकिन थे।
Muslim Women Act 2019: Triple Talaq जुर्म → एक साथ तीन तलाक न दें।
Guardians & Wards Act: बच्चों की हवालागी → बच्चों की तालीम और परवरिश के बेहतर सुबूत
दें।
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7. आसान चेक लिस्ट
मरहला इकदामात नोट
तलाक से पहले तहरीरी तलाक, गवाहों के साथ, मेहर व इद्दत का खर्च अदा सुबूत लाज़मी महफूज़ करें
अहम दस्तावेजात निकाह नामा, तलाक नामा, जहेज़ वापसी की रसीद, इस्लाह के सुबूत, आमदनी के कागजात अदालत में दिफ़ा के लिए
झूठे मुक़दमात वकील से राब्ता, Anticipatory Bail, पुलिस से ताऊन सिर्फ वकील के साथ दिफ़ा मज़बूत रखें
नान व नफ़्क़ा आमदनी दुरुस्त बताएं, बीवी की आमदनी या निकाह-ए-सानी के सुबूत दें खर्च महदूद या ख़त्म हो सकता है
जहेज़ / सामान वापसी की रसीद या गवाह इलज़ाम बेअसर होगा
बच्चों की कस्टडी तालीम व अखराजात के सुबूत, बेहतर परवरिश के शवाहिद फैसला बच्चों के मुफ़ाद में
Triple Talaq Act तीन तलाक एक साथ न दें, शरई तरतीब से कानूनी खतरा ख़त्म
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रूहानी पहलू सब्र, दुआ, बर्दाश्त, ज़िक्र व नमाज़ दिल को
सुकून व हौसला
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8. खुलासा
तलाक से पहले हर मुमकिन इस्लाह की कोशिश लाज़िम है।
तलाक हो तो भलाई और इंसाफ के साथ हो।
कानूनी दिफ़ा के लिए हर दस्तावेज़ और गवाह तैयार रखें।
सब्र, दुआ और हिकमत के साथ मामला हल करें।
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अल्लाहु तआला हम सब की जिंदगी आसान बनाए
आमीन सुम्मा आमीन