*खुशी का लम्हा सदा-ए-कलम से तार्रुफ़*


ज़िंदगी के सफ़र में कुछ खुशियाँ ऐसी भी होती हैं जो अल्फ़ाज़ में समेटी नहीं जातीं, आज दिल उन्हीं नायाब खुशियों में से एक खुशी महसूस कर रहा है, जब मुझे *सदा-ए-कलम* जैसा इल्मी व अदबी प्लेटफ़ॉर्म मिला, ये महज़ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि एहसासात व ख्यालात की वो दुनिया है जहां कलम बोलता है, दिल लिखता है, और इल्म रौशनी बिखेरता है, यहां हर मज़मून में फ़िक्र की ताज़गी है, हर लफ़्ज़ में ईमान की खुशबू है, और हर तहरीर में इस्लाह-ए-मुआशरा का जज़्बा।


मैं अपने रब का बे-हद शुक्रगुज़ार हूं जिस ने मुझे इस राह पर गामज़न किया, और साथ ही उस मेहरबान इंसान का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिस ने मुझे सदा-ए-कलम तक पहुंचने की रहनुमाई की।

और यक़ीनन बाज़ मुहर्रिर बहुत उम्दा लिखते हैं कभी सोचता आख़िर इस तरह लिखना और मुख़्तसर अल्फ़ाज़ में अपने मा फ़िज़्ज़मीर को समझाने का मादा कहां से आए गा, अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त कातबीन हक़्क़ा का सदक़ा अता फरमाए आमीन बिजाहि नबी अल करीम ﷺ।


यक़ीनन: सदा-ए-कलम सिर्फ़ एक नाम नहीं, बल्कि एक सदा है जो हर साहिब-ए-कलम के दिल से निकल कर रौशनी बन जाती है।

अल्लाह करीम हमारे तमाम कातबीन को हक़ व सदाक़त पर गामज़न रहने की तौफ़ीक़ बख़्शे और हमारे कलम में मज़ीद तासीर पैदा फरमाए आमीन।


*✍️मुताल्लिम अल जामिया अल अशरफिया✍️*