*रमजान मुबारक के अहकाम*
*रोज़े की हालत में बलगम का हुक्म*
अगर रोज़े की हालत में खुद ब खुद या कंखारने की वजह से मुंह में बलगम आज़ाए तो इससे रोज़ा नहीं टूटता है चाहे उसे निगल ले या बाहर थूक दे लेकिन पेट की तरफ से आने वाला बलगम इतना ज़्यादा था कि उसको मुंह में रोकना मुश्किल हो रहा था तो बा'ज़ उलमा के नज़दीक रोज़ा टूट जाता है इसलिए रोज़े की हालत में बिला ज़रूरत खनखारने से एहतियात करना चाहिए
नोट : कै के बारे में मज़कूरा तमाम तफसील उस वक़्त है जब कि रोज़ादार को याद हो कि वो रोज़ा से है लेकिन अगर किसी को रोज़ा याद ही ना हो तो फिर कै की किसी भी सूरत में रोज़ा नहीं टूटेगा
۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔۔वल्लाहू आलम बिस्सव़ाब