रमज़ान के फ़ज़ाइल
रमज़ान आया रहमतों की बरसात लेकर
दिल की ज़मीं पर नूर की सौगात लेकर
हर सम्त फैली मग़फ़िरत की रौशनी है
आया है रमज़ान रब की ख़ास इनायात लेकर 💐
अल्लाह ताला ने इस मुक़द्दस महीने में क़ुरान को नाज़िल किया । ( सूरह बक़रह )
रमज़ान में उमराह करने का सवाब हज के बराबर है (सही बुख़ारी)
इस माह के रोज़े और क़ियाम गुज़िश्ता गुनाहों का कफ़्फ़ारा हैं ।(सही बुख़ारी)
इस में एक रात है जो हज़ार महीनों से बेहतर है ।(सूरह अल-क़द्र)
अल्लाह ताला इस की रात लोगों को जहन्नम से आज़ाद करते हैं।(मुसनद अहमद)
इस माह में जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं , और जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं और सरकश शयातीन को जकड़ दिया जाता है।(सही बुख़ारी)
एक रमज़ान दूसरे रमज़ान के दरमियान में होने वाले गुनाहों की मग़फ़िरत का बाइस है जब तक कि कबीरा गुनाहों से इज्तिनाब किया जाए। (सही मुस्लिम)
रमज़ान में की गई एक तस्बीह ग़ैर रमज़ान में की गई हज़ार तस्बीहात से अफ़ज़ल ।
(इमाम ज़ुहरी रहमतुल्लाह अलैह, फ़ज़ाइल रमज़ान ला इब्न अबी अद-दुनिया) ।
रमज़ानुल मुबारक हिदायत , इबादत , सब्र , तक़वा और मग़फ़िरत का महीना है ।
यह अपने नफ़्स की इस्लाह, अल्लाह से ताल्लुक़ मज़बूत करने और आखिरत की तैयारी करने का बेहतरीन मौक़ा है ।
हमें चाहिए कि इस बाबरकत महीने की क़द्र करें और ज़्यादा से ज़्यादा इबादत, तिलावत क़ुरान और नेकियोँ में मशग़ूल रहें।
अल्लाह ताला हमें रमज़ान की सही क़द्र करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए । आमीन
सहर की साअत , इफ़्तार की वो घड़ी
दिल में दुआ , आँखों में नमी
यह माह सब्र व शुक्र है मोमिन के लिए
हर साँस में रहमत की ख़ुशबू है जड़ी 🍁
अनमोल ✍️